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रेडियो कार्बन डेटिंग क्या है उम्र निर्धारण और उपयोग | Radio Carbon Dating in Hindi

इस पोस्ट में हम जानेंगे रेडियो कार्बन डेटिंग क्या है उम्र निर्धारण और उपयोग Radio Carbon Dating in Hindi के बारे मे, अगर आपको रेडियो कार्बन डेटिंग क्या है, इसकी परिभाषा विधि, प्रकार और उदाहरण के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है, तो इस पोस्ट को पूरा पढे, तो चलिये अब रेडियो कार्बन डेटिंग के बारे मे जानते है,

रेडियो कार्बन डेटिंग क्या है

Radio Carbon Dating in Hindi

Radio Carbon Dating in Hindiपुरातत्व विभाग, जीव विज्ञान में जंतुओं एवं पौधों के प्राप्त अवशेषों के आधार पर जीवन काल, समय चक्र का निर्धारण करने में कार्बन काल निर्धारण विधि का प्रयोग किया जाता है। रेडियो कार्बन डेटिंग कहते है।

रेडियो कार्बन डेटिंग द्वारा जीवाष्म,लकड़ी आदि कि आयु का पता लगाया जाता है, इस प्रक्रिया में कार्बन का C14 अपरूप बहुत महत्व रखता है जिसे रेड़ियोधर्मी कार्बन भी कहते है,यह सभी जीवो व पौधो मे होता है, लेकिन जिस दिन वह मरता है उसी दिन से इस कार्बन का विघटन शुरू हो जाता है, चूकि यह एक रेड़ियोधर्मी पदार्थ होता है अतः इसका अर्धआयुकाल ज्ञात कर जैव पदार्थ कि आयु ज्ञात कि जा सकती है|

रेडियो कार्बन डेटिंग की परिभाषा

Definition of Radio Carbon Dating in Hindi

रेडियो कार्बन डेटिंग जंतुओं एवं पौधों के प्राप्त अवशेषों की आयु निर्धारण करने की विधि है। इस कार्य के लिये कार्बन-14 का प्रयोग किया जाता है। यह तत्त्व सभी सजीवों में पाया जाता है।

रेडियो कार्बन डेटिंग विधि

Radio Carbon Dating Method in Hindi

इसमें कार्बन-12 एवं कार्बन-14 के मध्य अनुपात निकाला जाता है। कार्बन-14 कार्बन का रेडियोधर्मी आइसोटोप है, इसका अर्धआयुकाल 5730 वर्ष का है। कार्बन डेटिंग को रेडियोएक्टिव पदार्थो कीआयुसीमा निर्धारण करने में प्रयोग किया जाता है।

कार्बनकाल विधि के माध्यम से तिथि निर्धारण होने पर इतिहास एवं वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी होने में सहायता मिलती है। यह विधि कई कारणों से विवादों में रही है वैज्ञानिकों के मुताबिक रेडियोकॉर्बन का जितनी तेजी से क्षय होता है, उससे 27 से 28 प्रतिशत ज्यादा इसका निर्माण होता है। जिससे संतुलन की अवस्था प्राप्त होना मुश्किल है।

ऐसा माना जाता है कि प्राणियों की मृत्यु के बाद भी वे कार्बन का अवशोषण करते हैं और अस्थिर रेडियोएक्टिवतत्व का धीरे-धीरे क्षय होता है। पुरातात्विक सैंपल में मौजूद कॉर्बन-14 के आधार पर उसकी डेट की गणना करते हैं।

रेडियो कार्बन डेटिंग का इतिहास

History of Radio Carbon Dating in Hindi

रेडियो कार्बन डेटिंग तकनीक का आविष्कार 1949 में शिकागो विश्वविद्यालय के विलियर्ड लिबी और उनके साथियों ने किया था। 1960 में उन्हें इस कार्य के लिए रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। उन्होंने कार्बन डेटिंग के माध्यम से पहली बार लकड़ी की आयु पता की थी।

रेडियो आयु-अंकन पद्धति

Radio Carbon Dating in Hindi

हमारे वायुमंडल में कार्बन दो रूपों में पाया जाता है- C12 (सामान्य कार्बन) तथा C14(रेडियो सक्रिय कार्बन)।, हरित पादपों द्वारा जब प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया सम्पन्न की जाती है, तो उसके लिए जिस कार्बन डाइआक्साइड की जरुरत होती है ,उसमें C12 एवं C14 दोनों ही मौजूद होते ।

इस प्रक्रिया के द्वारा ही भोज्य पदार्थ/ग्लुकोज का निर्माण होता है, अत: इसमें जो कार्बन उपस्थित होता है, वह भी इन दोनों ही रूपों में पाया जाता है। जब जंतुओं द्वारा इन पादपों/पादप उत्पादों को खाया जाता है तो कार्बन के ये दोनों ही रूप C12एवं C14 जंतु के शरीर में भी मौजूद होते हैं।

जब किसी जीव की मृत्यु होती है, तो उसमें C12 की मात्रा तो यथावत बनी रहती है, परंतु समय बीतने के साथ C14 की मात्रा घटती चली जाती है (C14 वस्तुतः एक रेडियो सक्रिय तत्व है, अत: इसका विघटन होता है)।

ऐसे में C12 एवं C14 के अनुपात के आधार पर हम इस बात का पता लगा सकने की स्थिति में होते हैं कि कोई भी जीवाश्म कितना पुराना है अर्थात उसका जीवनकाल क्या रहा होगा।

किसी भी जीव के जीवित रहने की स्थिति में C12एवं C14 का अनुपात हमेशा स्थिर होता है, जो कि 1012:1 होता है।

रेडियो कार्बन डेटिंग का उदाहरण

Example of Radio Carbon Dating in Hindi

यदि यह मान लिया जाये कि जीवाश्म के अंदर C12 की कुल मात्रा 1000X1012है, तो इसका तात्पर्य यह हुआ कि यह जीवाश्म जब जीवित अवस्था में जीव के रूप में था तो इसमें C12 की मात्रा यथावत ही रही होगी ( C12विघटित नहीं होता)। इसका तात्पर्य यह भी है कि उस जीवित अवस्था में जीव में मौजूद C14 की कुल मात्रा 1000 रही होगी।

यदि जीवाश्म में वर्तमान में मौजूद C14की मात्रा 500 हो, तो इसका तात्पर्य यह हुआ कि इसका द्रव्यमान जीवित अवस्था की अपेक्षा ठीक आधी रह गयी है। हम यह भी जानते हैं कि C14 की अर्द्ध-आयु 5730 वर्ष होती है; अर्थात यह जीवाश्म 5730 वर्ष पुरानी मानी जायेगी।

अर्द्ध-आयु-जितने समय में किसी रडियो सक्रिय तत्व का द्रव्यमान आधा हो जाता है, उसे ही उस तत्व की अर्द्ध-आयु  कहते हैं।

रेडियो कार्बन डेटिंग का उपयोग

Use of Radio Carbon Dating in Hindi

रेडियो कार्बन डेटिंग का इस्तेमाल कई सारी जगह पर किया जा सकता है। जैसे कि :-

  • लकड़ी और चारकोल
  • पुरातात्विक खोज में
  • हड्डी , चमड़े, बाल, और रक्त अवशेष की उम्र की गणना
  • पीट और मिट्टी
  • शैल और कोरल या चिटिन के उम्र की गणना
  • पुराने बर्तन जहां कार्बनिक अवशेष उपलब्ध है।
  • दीवारों पर चित्रकारी आमतौर पर कुचले फल और कीड़े जैसे कार्बनिक पदार्थों का उपयोग होता है।

अधिकांश कार्बनिक पदार्थ तब तक उपयोग होते हैं जब तक कि यह पर्याप्त उम्र के होते हैं और खनिज का मिश्रण इनमें नहीं होता है। पत्थर और धातु की डेटिंग नहीं की जा सकती है, लेकिन बर्तनों की डेटिंग की जा सकती है क्योंकि उनमें खाने के अवशेष और बर्तन को खूबसूरत बनाने के लिए उसमें लगे रंग जैसे कार्बनिक पदार्थ का उपयोग किया गया हो।

रेडियो कार्बन डेटिंग से संबन्धित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर

Some important questions and their answers related to Radio Carbon Dating in Hindi (FAQs)

प्रश्न :- रेडियो कार्बन-14 कालनिर्धारण विधि क्या है

उत्तर :- रेडियो कार्बन-14 कालनिर्धारण विधि – सभी सजीव वस्तुओं में एक प्रकार का रेडियोधर्मी कार्बन होता है, जिसे कार्बन-14 कहते हैं। कार्बन-14 डेटिंग द्वारा पुरातत्व कालीन जीव जन्तुओं के अवशेषों द्वारा आयु, समय का निर्धारण किया जाता है। इसके लिए कार्बन-12 और कार्बन-14 के मध्य अनुपात का उपयोग करते हैं।

प्रश्न :- कार्बन डेटिंग पद्धति क्या है

उत्तर :- कार्बन डेटिंग पद्धति के जरिये कार्बन-12 और कार्बन-14 के बीच अनुपात निकाला जाता है. कार्बन-14 एक तरह से कार्बन का ही रेडियोधर्मी आइसोटोप है, इसका अर्धआयुकाल 5730 साल का है. कार्बन डेटिंग को रेडियोएक्टिव पदार्थो की आयुसीमा निर्धारण करने में प्रयोग किया जाता है.

प्रश्न :- कार्बन 14 पद्धति क्या है

उत्तर :- कार्बन-14 एक तरह से कार्बन का ही रेडियोधर्मी आइसोटोप है, इसका अर्धआयुकाल 5730 साल का है, कार्बन डेटिंग को रेडियोएक्टिव पदार्थो की आयुसीमा निर्धारण करने में प्रयोग किया जाता है,

न्याय प्रणाली में कार्बन काल विधि के माध्यम से तिथि निर्धारण होने पर इतिहास एवं वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है

प्रश्न :- कार्बन-12 पद्धति क्या है

उत्तर :- कार्बन-12 विधि मे कार्बन-12 और पुरातत्व, जीव विज्ञान में जंतुओं एवं पौधों के प्राप्त अवशेषों के आधार पर जीवन काल, समय चक्र का निर्धारण करने में कार्बन काल निर्धारण विधि का प्रयोग किया जाता है। इसमें कार्बन-12 एवं कार्बन-14 के मध्य अनुपात निकाला जाता है।

प्रश्न :- कार्बन 14 क्या है इतिहास में इसकी क्या उपयोगिता है

उत्तर :- रेडियो कार्बन डेटिंग जंतुओं एवं पौधों के प्राप्त अवशेषों की आयु निर्धारण करने की विधि है। इस कार्य के लिये कार्बन-14 का प्रयोग किया जाता है। यह तत्त्व सभी सजीवों में पाया जाता है। कार्बन-14, कार्बन का एक रेडियोधर्मी आइसोटोप है, जिसकी अर्द्ध-आयु लगभग 5,730 वर्ष मानी जाती है।

प्रश्न :- कार्बन डेटिंग पद्धति के जन्मदाता थे

उत्तर :- रेडियो कार्बन डेटिंग तकनीक का आविष्कार 1949 में शिकागो विश्वविद्यालय के विलियर्ड लिबी और उनके साथियों ने किया था. अतः कार्बन डेटिंग पद्धति के जन्मदाता विलियर्ड लिबी को माना जाता है, जिसके लिए उन्हे और उनके टीम को 1960 में उन्हें इस कार्य के लिए रसायन विज्ञान के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्होंने कार्बन डेटिंग के माध्यम से पहली बार लकड़ी की आयु पता की थी

प्रश्न :- कार्बन डेटिंग क्या है? परिभाषित कीजिए।

उत्तर :- रेडियो कार्बन डेटिंग या कार्बन डेटिंग (Carbon Dating) ऐसी विधि है, जिसकी सहायता से किसी भी चीज का उम्र की गणना की जाती है। इससे ‘एप्सोल्युट डेटिंग’ भी कहा जाता है।

तो आपको यह पोस्ट रेडियो कार्बन डेटिंग क्या है उम्र निर्धारण और उपयोग Radio Carbon Dating in Hindi मे दी गयी जानकारी कैसा लगा कमेंट मे जरूर बताए और इस पोस्ट को लोगो के साथ शेयर भी जरूर करे,

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