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खनिज क्या होते हैं अर्थ परिभाषा और प्रकार | Mineral in Hindi


आज के इस पोस्ट मे खनिज क्या होते हैं अर्थ परिभाषा और प्रकार Mineral in Hindi के बारे मे जानेगे।

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खनिज क्या होते हैं

Mineral In Hindi

What is a mineral in Hindiखनिज,हमारे जीवन के अति अनिवार्य भागों में से एक होता है, लगभग हर वह चीज जो हम इस्तेमाल करते हैं चाहे एक छोटी सुई हो या एक बड़ी इमारत या फिर एक बड़ा जहाज आदि सभी चीजें खनिजों से मिलकर बने हैं। रेलवे लाइन,औजार, मशीन, कार, बस, रेलगाड़ियां आदि आदि भी खनिज से ही मिलकर बनी होती है तथा पृथ्वी के भूगर्भ से प्राप्त ऊर्जा के संसाधनों द्वारा संचालित होती है।

यहां तक कि हम जो भोजन ग्रहण करते हैं उसमें भी खनिज होते हैं। मनुष्य ने विकास की सभी अवस्थाओं में अपनी जीविका तथा सजावट, त्योहारों पर धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खनिजों का प्रयोग किया है।

खनिज का अर्थ और परिभाषा

Meaning and definitions of mineral in Hindi

मूलतः खनिज शब्द का अर्थ है- खनि + ज। अर्थात् खान से उत्पन्न (संस्कृत: खनि= खान)। इसका अंग्रेज़ी शब्द मिनरल (mineral) भी माइन (mine) से संबंध रखता है। खनिज ऐसे भौतिक पदार्थ हैं जो खान से खोद कर निकाले जाते हैं। कुछ उपयोगी खनिज पदार्थों के नाम हैं – लोहा, अभ्रक, कोयला, बॉक्साइट (जिससे अलुमिनियम बनता है), नमक (पाकिस्तान व भारत के अनेक क्षेत्रों में खान से नमक निकाला जाता है!), जस्ता, चूना पत्थर इत्यादि। खनिज होने के लिए उस पदार्थ को कठोर व क्रिस्टलीय होना आवश्यक है। कुछ परिभाषाओं के अनुसार खनिज वह पदार्थ है जो क्रिस्टलीय हो और भौगोलिक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप बना हो।

भू वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाया जाता है जिसमें हीरा सबसे कठोर और चूना सबसे नरम होता है। “वह क्रिस्टलीय पदार्थ, जो भौगोलिक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप बनते हैं खनिज कहलाते हैं।”

खनिज के प्रकार

Types of minerals in Hindi

प्राकृतिक रूप से प्राप्त खनिज निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है-

  1. धात्विक खनिज (Metallic minerals)
  2. अधात्विक खनिज (Non-metallic minerals)
  3. ऊर्जा खनिज (Energy minerals)

धात्विक खनिज

Metallic minerals in Hindi

जब खुदाई की जाती है तो पृथ्वी में से निकलने वाले पदार्थों में कई तरह की अशुद्धियां होती है। विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं द्वारा खनिज लवण को दूर किया जाता है इसके पश्चात हमें जो खनिज प्राप्त होता है वह शुद्ध खनिज होता है और उसे धात्विक खनिज कहते हैं।

धात्विक खनिज को संक्षेप मे इस प्रकार से समझ सकते है –

  • ऐसे खनिज पदार्थ जिनमें धातु का अंश विद्यमान होता है, धात्विक खनिज कहलाते हैं।
  • धात्विक खनिज को गलाते है तो धातु प्राप्त होता है।
  • यह खनिज कठोर एवं चमकीले होते है।
  • इनको पीटकर तार/पत्तर बना सकते है। इनको पीटकर इनका आकार बदल सकते है।
  • ये खनिज पीटने पर भी टूटता नहीं है।
  • ये खनिज आग्नेय व कायान्तरित चट्टानों में पाये जाते है।
  • इसमें तन्मयता का गुण पाया जाता है।
  • धात्विक खनिज विद्युत के सुचालक होते है।

धात्विक खनिज के प्रकार

Types of metallic minerals in Hindi

लौह धातु:     लौह अयस्क मैंगनीज निकल कोबाल्ट आदि।
अलौह धातु:   तांबा, लेड ,टिन, बॉक्साइड ।
बहुमूल्य खनिज:   सोना, चांदी, Platinum आदि।

अधात्विक खनिज

Non-metallic minerals in Hindi

वे खनिज अयस्क जिनको खुदाई में से निकाला जाता है और शुद्ध करने के बाद अधातु प्राप्त की जाती है,   उन खनिज पदार्थों को अधात्विक खनिज कहा जाता है।
धात्विक खनिजों के उदाहरण ग्रेनाइट, सल्फर, लवण, पोटाश, अभ्रक संगमरमर चूना पत्थर बलुआ पत्थर आदि।

अधात्विक खनिज को संक्षेप मे इस प्रकार से समझ सकते है –

  • ऐसे खनिज पदार्थ जिनमें धातुओं का अंश बिल्कुल नहीं पाया जाता, अधात्विक खनिज कहलाते हैं।
  • अधात्विक खनिज को गलाने पर धातु प्राप्त नहीं होता।
  • ये भंगुर प्रकृति के होते हैं।
  • इन खनिजों की अपनी चमक होती है।
  • ये पत्थर एवं मिट्टी से बनते हैं तथा ये अवसादी एवं परतदार चट्टानों में पाये जाते है।
  • इन्हें पीटकर तार नहीं बना सकते। इन्हें पीटकर इनका आकार नहीं बदल सकते।
  • इनको पीटने पर ये टूटकर चूर-चूर हो जाते हैं।

ऊर्जा खनिज

Energy minerals in Hindi

जिन खनिज पदार्थों से ऊर्जा की प्राप्ति होती है ऊर्जा खनिज कहलाते हैं। ऊर्जा खनिज के उदाहरण कोयला पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस।

खनिजों का वर्गीकरण

Classification of minerals in Hindi

खनिजों को निम्नलिखित 8 वर्गों में बांटा गया है जो की इस प्रकार है- 

  1. सिलिकेट वर्ग
  2. कार्बोनेट वर्ग
  3. सल्फेट वर्ग
  4. हैलाइड वर्ग
  5. ऑक्साइड वर्ग
  6. सल्फाइड वर्ग
  7. फास्फेट वर्ग
  8. तत्व वर्ग

खनिज़ कैसे बनते हैं ?

How are minerals made in Hindi

खनिजों का बनना (formation) अनेक प्रकार से होता है। खनिजों के बनने में उष्मा, दाब तथा जल मुख्य रूप से भाग लेते हैं। निम्नलिखित विभिन्न प्रकारों से खनिज बनते हैं :

मैग्मा का मणिभीकरण (Crystallization from magma)

पृथ्वी के आभ्यंतर में मैग्मा में अनेक तत्व आक्साइड एवं सिलिकेट के रूपों में विद्यमान हैं। जब मैग्मा ठंडा होता है तब अनेक यौगिक खनिज के रूप में मणिभ (क्रिस्टलीय) हो जाते है और इस प्रकार खनिज निक्षेपों (deposit) को जन्म देते हैं। इस प्रकार के मुख्य उदाहरण हीरा, क्रोमाइट तथा मोनेटाइट हैं।

ऊर्ध्वपातन (Sublimation)

पृथ्वी के आभ्यंतर में उष्मा की अधिकता के कारण अनेक वाष्पशील यौगिक गैस में परिवर्तित हो जाते हैं। जब यह गैस शीतल भागों में पहुँचती है तब द्रव दशा में गए बिना ही ठोस बन जाती है। इस प्रकार के खनिज ज्वालामुखी द्वारों के समीप, अथवा धरातल के समीप, शीतल आग्नेय पुंजों (igneous masses) में प्राप्त होते हैं। गंधक का बनना उर्ध्वपातन क्रिया द्वारा ही हुआ है।

आसवन (Distillation)

ऐसा समझा जाता है कि समुद्र की तलछटों (sediments) में अंतर्भूत (imebdded) छोटे जीवों के कायविच्छेदन के पश्चात्‌ तैल उत्पन्न होता है, जो आसुत होता है और इस प्रकार आसवन द्वारा निर्मित वाष्प पेट्रोलियम में परिवर्तित हो जाता है अथवा कभी-कभी प्राकृतिक गैसों को उत्पन्न करता है।

वाष्पायन एवं अतिसंतृप्तीकरण (Vaporisation and Supersaturation)

अनेक लवण जल में घुल जाते हैं और इस प्रकार लवण जल के झरनों तथा झीलों को जन्म देते हैं। लवण जल का वाष्पायन द्वारा लवणों का अवशोषण (precipitation) होता है। इस प्रकार लवण निक्षेप अस्तित्व में आते हैं। इसके अतिरिक्त कभी कभी वाष्पायन द्वारा संतृप्त स्थिति आ जाने पर घुले हुए पदार्थों मणिभ पृथक हो जाते हैं।

गैसों, द्रवों एवं ठोसों की पारस्परिक अभिक्रियाएँ

जब दो विभिन्न गैसें पृथ्वी के आभ्यंतर से निकलकर धरातल तक पहुँचती हैं तथा परस्पर अभिक्रिया करती हैं तो अनेक यौगिक उत्पन्न होते है उदाहरणार्थ : 2H2S+SO2=3S+2H2O इसी प्रकार गैसें कुछ विलयनों पर अभिक्रिया करती हैं। फलस्वरूप कुछ खनिज अवक्षिप्त हो जाते हैं।

उदाहरण के लिए, जब हाइड्रोजन सल्फाइड गैस ताम्र-सल्फेट-विलयन से पारित होती है तब ताम्र सल्फाइड अवक्षिप्त हो जाता है। कभी ये गैसें ठोस पदार्थ से अभिक्रिया कर खनिजों को उत्पन्न करती हैं। यह क्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनेक खनिज सिलिकेट, आक्साइड तथा सल्फाइड के रूप में इसी क्रिया द्वारा निर्मित होते हैं। किसी समय ऐसा होता है कि पृथ्वी के आभ्यंतर का उष्ण आग्नेय शिलाओं से पारित होता है एवं विशाल संख्या में अयस्क कार्यों (ore bodies) को अपने में विलीन कर लेता है। यह विलयन पृथ्वी तल के समीप पहुँच कर अनेक धातुओं को अवक्षिप्त कर देता है। स्वर्ण के अनेक निक्षेप इसी प्रकार उत्पन्न हुए हैं।

कुछ अवस्थाओं में इस प्रकार के विलयन पृथ्वीतल के समीप विभिन्न शिलाओं के संपर्क में आते हैं तथा एक एक करके कणों का प्रतिस्थापन (replacement) होता है, अर्थात्‌ जब शिला के एक कण का निष्कासन होता है तो उस निष्कासित कण के स्थान पर धात्विक विलयन के एक कण का प्रतिस्थापन हो जाता है। इस प्रकार शिलाओं के स्थान पर नितांत नवीन धातुएँ मिलती हैं, जिनका आकार और परिमाण प्राचीन प्रतिस्थापित शिलाओं का ही होता है। अनेक दिशाओं में यदि शिलाओं में कुछ विदार (cracks) या शून्य स्थान (void or void spaces) होते हैं तो पारच्यवित विलयन (percolating solution) उन शून्य स्थानों में खनिज निक्षेपों को जन्म देते हैं। यह क्रिया अत्यंत सामान्य है, जिसने अनेक धात्विक निक्षेपों को उत्पन्न किया है।

जीवाणुओं (bacteria) द्वारा अवक्षेपण

यह भली प्रकार से ज्ञात है कि कुछ विशेष प्रकार के जीवाणुओं में विलयनों से खनिज अवक्षिप्त करने की क्षमता होती है। उदाहरणार्थ, कुछ जीवाणु लौह को अवक्षिप्त करते हैं। ये जीवाणु विभिन्न प्रकार के होते हैं तथा विभिन्न प्रकार के निक्षेपों का निर्माण करते हैं।

कलिलीय निक्षेपण (Collodial Deposition)

वे खनिज, जो जल में अविलेय हैं, विशाल परिमाण में कलिलीय विलयनों में परिवर्तित हो जाते हैं तथा जब इनसे कोई विद्युद्विश्लेष्य (electroyte) मिलता है तब ये विलयन अवक्षेप देते हैं। इस प्रकार कोई भी धातु अवक्षिप्त हो सकती है। कभी कभी अवक्षेपण के पश्चात्‌ अवक्षिप्त खनिज मणिभीय हो जाते हैं, किंतु अन्य दशाओं में ऐसा नहीं होता।

ऋतुक्षारण प्रक्रम (Weathering Process)

यह ऋतुक्षारण शिलाओं के अपक्षय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है उसी प्रकार जो विलयन बनते हैं उनमें लौह, मैंगनीज तथा दूसरे यौगिक हो सकते हैं। ये यौगिक, विलयनों द्वारा सागर में ले जाए जाते हैं और वहीं वे अवक्षिप्त हो जाते हैं। लौह तथा मैगनीज के निक्षेप इसी प्रकार उत्पन्न हुए। ऋतुक्षारण या तो पूर्ववर्ती (pre-existing) शिलाओं से अथवा पूर्ववर्ती खनिज निक्षेपों से हो सकता है। कुछ दशाओं में किसी शिला में कुछ अधोवर्ग (low grade) के विकिरित खनिज (disseminated minerals) होते हैं। तलीय जल शिलाओं के साधारण अवयवों को विलीन कर लेता है और अवशिष्ट भाग को मूल विकीरित खनिजों से समृद्ध करता है। अनेक अयस्क निक्षेप, अवशिष्ट उत्पाद के रूप में पाए जाते हैं, जैसे बाक्साइट। कुछ शिलाएँ, जैसे ग्रैनाइट (कणाश्म), वियोजन (disintegration) के पश्चात्‌ काइनाइट जैसे खनिजों को उत्पन्न करती हैं।

उपरूपांतरण (Metamorphism)

कुछ निक्षेप पूर्ववर्ती तलछटों के उपरूपांतरणों द्वारा निर्मित होते हैं। उदाहरण के लिए, चूना पत्थर संगमरमर को तथा कुछ मृत्तिकाएँ और सिलिका निक्षेप सिलोमनाइट को उत्पन्न करते हैं।

खनिज के उपयोग

Uses of Minerals In Hindi

खनिज एक प्राकृतिक रूप से उपस्थित समरूप तत्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है इसके साथ ही खनिजों के कई उपयोग भी होते हैं ।आइए आप जानते हैं की उपयोगिता क्या होती है-

  1. प्रत्येक चीज या वस्तु जिसका हम उपयोग करते हैं एक छोटी सुई से लेकर एक बड़ी इमारत तक या फिर एक बड़ा हवाई जहाज आदि सभी खनिज से मिलकर बने होते हैं।
  2. खनिजों के निर्यात से राष्ट्र विदेशी मुद्रा कमाते हैं।
  3. खनिज जैसे कोयला तथा पेट्रोलियम उर्जा के मुख्य स्रोत हैं।
  4. खनिजों के खनन तथा निष्कर्षण से लोगों को रोजगार प्रदान किया जाता है।

खनिजों का महत्व

Importance of minerals in Hindi

  • प्राकृतिक संसाधनों में खनिज पदार्थों का महत्त्वपूर्ण स्थान है।
  • देश के आर्थिक विकास और औद्योगिक विकास में खनिज महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • खनिज पदार्थ हमारे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक औद्योगिक उन्नति का आधार खनिज पदार्थ ही हैं।
  • कारखानों में लगी मशीनें, पानी पर तैरते विशाल जहाज, ऊँची इमारतें, विभिन्न प्रकार की धातुओं से बनी वस्तुएं खनिज पदार्थों की देन है।
  • देश की औद्योगिक विकास का आधार खनिज पदार्थ है।
  • यदि मनुष्य के पास धातु और खनिज पदार्थ नहीं होते तो, आज औद्योगिक उत्पादन और विकास बहुत कम होता।
  • खनिज लाभकारी समूह ने लौह, गैर-लौह अयस्कों, औद्योगिक और सामरिक खनिजों, कोयले और खदान / औद्योगिक कचरे के लिए प्रक्रिया के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है।
  • पिछले छह दशकों के दौरान, स्वदेशी और विदेशी अयस्क और खनिज नमूनों की एक बड़ी विविधता के लाभ पर व्यवस्थित अनुसंधान के बाद 900 से अधिक आर एंड डी अध्ययन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है।
  • अध्ययन के आधार पर बड़ी संख्या में वाणिज्यिक लाभकारी संयंत्रों को चालू किया गया है और समूह को खनिज आधारित उद्योगों को सहायता देना जारी रखा गया है।
  • वर्तमान आर्थिक एवं वैज्ञानिक युग में खनिज पदार्थों का महत्त्व बहुत अधिक है, क्योंकि जिस देश में खनिज पदार्थों का अगाध भण्डार है, वही देश आज विश्व में सबसे अधिक आर्थिक, औद्योगिक और व्यापार सम्बन्धी उन्नति कर सका है। रूस, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, भारत, चीन, जापान, अमेरिका ऐसे ही राष्ट्र हैं, जिन्होंने अन्य देशों की अपेक्षा अधिक उन्नति की है।
  • आज का औद्योगिक अर्थतन्त्र पूर्णतः खनिज (Mineral in Hindi) आधारित है क्योंकि यन्त्रों का निर्माण, ऊर्जा और अनेक कच्चे माल खनिजों से प्राप्त होते हैं।

खनिजों के भौतिक गुण

Examples of Minerals In Hindi

एक खनिज प्राकृतिक मूल का एक अकार्बनिक ठोस पर्दाथ है जिसमें एक बहुत ही विशेष आंतरिक परमाणु संरचना और एक परिभाषित रासायनिक संरचना होती है। खनिजों में कई विशेषताएं और भौतिक गुण हैं जिससे वो पहचाने जाते हैं कुछ महत्वपूर्ण गुणों के बारे में बताया गया है-

  • आदत:
    प्रकृति में उत्तम क्रिस्टल दुर्लभ होते हैं क्रिस्टल में विकसित होने वाले चेहरे क्रिस्टल को बढ़ाने के लिए उपलब्ध स्थान पर निर्भर करते हैं। इन सामान्य रूपों से समरूपता स्पष्ट रूप से स्पष्ट नहीं हो सकती है।
  • रंग:
    अधिकांश खनिजों में एक विशिष्ट रंग होता है जिसका उपयोग उनकी  पहचान के लिए किया जा सकता है। अपारदर्शी खनिजों में रंग अधिक सुसंगत होता है इसलिए इन खनिजों से जुड़े रंगों के बारे में  सीखना खनिजों की पहचान में बहुत उपयोगी हो सकते है।
  • पट्टी:
    लाइन का रंग से गहरा संबंध है, लेकिन यह एक अलग गुण है क्योंकि खनिज का रंग रेखा के रंग से अलग हो सकता है। लाइन वास्तव में एक खनिज पाउडर का रंग है जिसे Strip कहा जाता है क्योंकि स्ट्रिप को Test करने का उचित तरीका एक खनिज को अनजाने में सफेद चीनी मिट्टी के बरतन पर रगड़ना है और उसके पीछे छोडे गए “Strip” के रंग की जांच करना है।
  • कठोरता:
    यह अपेक्षाकृत चिकनी और ताजी सतह पर घर्षण प्रतिरोध के रूप में प्रदर्शित होता है। यह अयस्क में Bound की ताकत का एक अप्रत्यक्ष उपाय है।
  • चमक:
    चमक खनिजों की संपत्ति है जो बताती है कि एक खनिज की सतह प्रकाश को कितना दर्शा सकती है। एक खनिज की चमक खनिज सतह का निरीक्षण करने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रकाश की चमक से प्रभावित होती है।

खनिजों के उदाहरण

Uses of minerals in Hindi

यहां उदाहरण दिए गए हैं जो आपको अवधारणा को गहराई से समझने में मदद करेंगे। हम कई रूपों में खनिजों से घिरे हुए हैं। खनिजों के उदाहरण देखें:

  • खनिजों में सोना, हीरे, सेंधा नमक और ग्रेफाइट शामिल हैं जिनका उपयोग पेंसिल लेड बनाने के लिए किया जाता है
  • सोडियम क्लोराइड खनिज है जो टेबल नमक बनाता है क्योंकि यह छोटे क्यूब्स के आकार के क्रिस्टल में होता है, इसकी एक संगठित संरचना होती है
  • क्वार्ट्ज, जिसे सिलिकॉन डाइऑक्साइड भी कहा जाता है, एक अन्य सामान्य खनिज है। इसके क्रिस्टल का हेक्सागोनल आकार अद्वितीय है। कोयला एक कार्बन-आधारित सामग्री है जिसे सबसे पहले जीवित प्राणियों ने प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के माध्यम से ग्रहण किया था
  • चूना पत्थर एक प्रकार की चट्टान है जो केवल एक खनिज से बनी होती है: कैल्शियम कार्बोनेट। पृथ्वी पर उनकी उत्पत्ति के आधार पर आग्नेय, अवसादी और कायांतरित चट्टानों को तीन प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है.

तो आपको यह पोस्ट खनिज क्या होते हैं अर्थ परिभाषा और प्रकार (Mineral in Hindi) कैसा लगा कमेंट मे जरूर बताए और इस पोस्ट को लोगो के साथ शेयर भी जरूर करे…

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