आर्किमिडीज का सिद्धांत क्या है | Archimedes Principle in Hindi

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Archimedes Principle – इस पोस्ट हम आर्किमिडीज का सिद्धांत क्या है, इसकी परिभाषा क्या है, आर्किमिडीज का सिद्धांत के अनुप्रयोग और इसके सूत्र को जानेगे, तो चलिए इस Archimedes Principle को जानते है, जो की कक्षा 6, 7, 8, 9, 10, 11 या 12 के छात्रो से अक्सर पूछा जाता है.

आर्किमिडीज का सिद्धांत और परिभाषा

Archimedes Principle in Hindi

आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार जब एक ठोस वस्तु किसी द्रव में पूरी अथवा आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो उसके भार में कमी का आभार होता है। उस वस्तु के भार में यह आभासी कमी वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होती है। चुकी इस नियम की खोज महान यूनानी भौतिक गणितज्ञ आर्किमिडीज ने किया था, इसलिए उनके नाम पर इस सिद्धान्त को आर्किमिडीज का सिद्धांत कहा जाता है.

आर्किमिडीज के सिद्धांत की परिभाषा –

आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार जब किसी वस्तु को किसी द्रव में आंशिक या पूर्णरूप से डुबोया जाता है, तो उस वस्तु के भार में कुछ कमी का अहसास होता है, यह कमी वस्तु के द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होता है.

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आर्किमिडीज का सिद्धांत का सूत्र

Archimedes Principle Formula in Hindi

आर्किमिडीज का सिद्धांत के अनुसार किसी द्रव में वस्तु के डुबाने पर जो उत्प्लावन बल का मान होता है, वह हटाये गये द्रव के भार के बराबर होता है.

यानि उत्प्लावन बल = हटाये गये द्रव का भार

Force (F) = Weight (W)

और बल हमेसा ऊपर की ओर यानि द्रव के बाहरी तरफ लगता है.

आर्किमिडीज के सिद्धांत की उदाहरण सहित व्याख्या

Archimedes Principle with Example in Hindi

Archimedes Principle In Hindiआर्किमिडीज़ का सिद्धांत अनुसार जब किसी वस्तु को पूरी तरह या आंशिक रूप से एक द्रव (गैस या तरल) में डूबाया जाता है, तो उसपर ऊपर की ओर से कार्य करता है, जो की उसके डूबे हुए भार और हटाये गये जल के भार के बराबर होता है.

उदाहरण के लिए, एक जहाज जिसे समुंद्र में जब तैरने के लिए लाया जाता है, तो यदि उस जहाज का भार उसके द्वारा हटाये गये जल के भार के बराबर नही हो, तो वह जहाज पानी में डूब सकता है, इसलिए जहाजो को कुछ इस तरह खास डिजाईन किया जाता है, जहाज का भार की तुलना में उसके द्वारा हटाये गये जल का भार अधिक होता है, तो इस तरह जल द्वारा जहाज को ऊपर की तरफ विस्थापित यानि उछाल बल लगता है, जिससे जल के ऊपर जहाज तैरता रहता है.

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तो इस तरह आर्किमिडीज के सिद्धांत से पता कर सकते है, की कौन सी वस्तु पानी पर तैरेगी और कौन सी डूब जायेगी यह उस वस्तु के घनत्व पर निर्भर करता है, किसी वस्तु की मात्रा और परिमाण के अनुपात को घनत्व कहते हैं.

भौतिक शास्त्र के अनुसार यदि वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है तो वह पानी में तैरती है और यदि उस वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होता है तो वह पानी में डूब जाती है.

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तो इस तरह आर्किमिडीज़ का सिद्धांत की मदद से इससे वैज्ञानिकों को पता चल गया कि कोई वस्तु जल में क्यों तैरती है, इसके बाद बड़े बड़े जहाजों का निर्माण किया जाने लगा, जिससे समुद्री यात्रा संभव हो सकी और जब भी कोई वस्तु द्रव में तैरती है तो वस्तु का वजन नीचे की ओर बल लगाता है. वस्तु के द्वारा हटाया गया द्रव ऊपर की ओर. यदि इन दोनों बल की मात्रा बराबर होती है, तो वस्तु तैरने लगती है, अन्यथा वस्तु डूब जाती है.

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तो इस पोस्ट आप सभी आर्किमिडीज का सिद्धांत क्या है, इसकी परिभाषा क्या है, आर्किमिडीज का सिद्धांत के अनुप्रयोग और इसके सूत्र को जान को अच्छी तरह से समझ गये होंगे.

और अधिक जानने के लिए :- Wikipedia पर  पढ़े आर्किमिडीज का सिद्धांत

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