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सिकंदर का इतिहास जीवन परिचय युद्ध विश्व विजय अभियान और मृत्यु | History of Sikandar in Hindi

आज के इस पोस्ट मे सिकंदर की जीवनी इतिहास History of Sikandar in Hindi के बारे मे जानेगे। इतिहास में कुछ लोग हमेशा याद किए जाते हैं, जब भी बात विश्व विजय की आती है, तो इनमे विश्व विजय का सपना देखने वाले सिकंदर का नाम सबसे ऊपर आता है, तो चलिये यहा सिकंदर का इतिहास जीवन परिचय युद्ध विश्व विजय अभियान और मृत्यु History of Sikandar in Hindi Alexander the Great (अलेक्जेंडर द ग्रेट) Biography Jeevan Parichay Date Of Birth, Birth Place, Father, Mother, Wife Children, Fight, Death जानेगे.

सिकंदर का इतिहास जीवन परिचय युद्ध विश्व विजय अभियान और मृत्यु

History of Sikandar in Hindi

History of Sikandar in Hindiविश्व के इतिहास मे कई महान राजा हो गये। लेकिन  एक ही ऐसा महान राजा हुवा था। जो पुरे विश्व को जीतने के लिए निकला था। जिसे हम सभी सिकंदर के नाम से जानते है, हा जी एक ऐसा सम्राट जिसके ऊपर ये कहावत भी फिट बैठती है – “जो जीता वही सिकंदर”, और “हारी बाजी को जिसे जीतना आए वही सिकंदर” और “वो सिकंदर ही दोस्तों कहलाता है, हारी बाज़ी को जीतना जिसे आता है”

सिकंदर का पूरा नाम अलेक्जेंडर (Alexander) था। लेकिन  पूरी दुनिया सिकंदर के नाम से जानती हैं। आज हम सिकंदर का इतिहास बताएँगे। सिकंदर भारत कब आया था यहा इससे संबन्धित सभी जानकारी बताएँगे। क्यूकी कहा जाता है, की भारत मे सिकंदर की हार हुई थी, लेकिन धोखे से उसे महान बताने के लिए उसके हार की कहानी को जीत मे लिखा गया है, इसमे विरोधाभास है, जिस कारण से उसे कुछ लोग महान और तो कुछ लोग क्रूर शासक के रूप मे जानते है।

सिकंदर ने आधी से भी ज्यादा दुनिया को जीत लिया था। उसे एलेक्ज़ेंडर तृतीय तथा एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन नाम से भी जाना जाता है। सिकंदर ने मृत्यु तक पूरी दुनिया को जीत लिया था। उसकी सारी माहिती प्राचीन ग्रीक के सारे व्यक्ति के पास थी। इसीलिए Sikandar को विश्वविजेता भी कहा जाता है। उसके नाम के साथ महान या दी ग्रेट भी लगाया जाता हैं। इतिहास में वह सबसे कुशल और यशस्वी सेनापति माना गया है। तो चलिए बताते है की सिकंदर कौन था।

सिकंदर का जीवन परीचय

Sikandar Biography in Hindi

  • पूरा नाम (Name) : – सिकंदर महान्  / अलेक्सेंडर
  • अन्य नाम (Nick name) :- अलक्ष्येन्द्र, एलेक्ज़ेंडर तृतीय, एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन
  • जन्म दिन (Birth Date) :- 20 जुलाई 356 ईसा पूर्व
  • जन्म स्थान (Birth place) :- पेला, मैसेडोन, यूनान
  • पिता (Father) :- फिलिप द्वितीय
  • माता (Mother) :- ओलिम्पिया
  • सौतेली  माता (Step Mother) :- क्लेओपटेरा
  • पत्नी (Wife) :- रोक्जाना, बैक्ट्रिया, स्ट्रैटेयरा द्वितीय
  • नाना (Grand Father) :- निओप्टोलेमस
  • शिक्षकों के नाम (Tutor’s name) :- दी स्टर्न लियोनीडास ऑफ़ एपिरुस, लाईसिमेक्स, एरिसटोटल (अरस्तू)
  • विशेषता (Specialty) :- अलेक्सेंडर बचपन से ही एक अच्छा घुड़सवार और योद्धा था
  • शौक (Hobbies) :- गणित, विज्ञान और दर्शन शास्त्र मे रूचि
  • घोड़े का नाम (Horse’s name) :- बुसेफेल्स
  • जीते हुए देश (Conquered Countries) :– एथेंस, एशिया माइनर,पेलेस्टाइन और पूरा पर्सिया और सिन्धु के पहले तक का तब का भारत
  • मृत्यु (Death Date) :-13 जून 323 ईसा पूर्व
  • मृत्यु का कारण (Death Reason) :- मलेरिया
  • मृत्यु का स्थान (Death Place) :- बेबीलोन
  • विवाद (controversy) :- अलेक्जेंडर ने एक राजा के तौर पर बहुत से युद्ध किये और देश जीते लेकिन अपने पिता की दूसरी शादी पर उनका शाही दरबार में पिता और अपनी सौतेली माँ के चाचा से विवाद हो गया.

सिकंदर का जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

Birth and Early life of Sikandar in Hindi

सिकंदर का जन्म 20 जुलाई, 356 ईसा पूर्व में प्राचीन नेपोलियन की राजधानी पेला में हुआ था। सिकंदर, के पिता का नाम फिलीप द्धितीय था जो कि मेक्डोनिया और ओलम्पिया के राजा थे और उनकी माता का नाम ओलिम्पिया था। ऐसा कहा जाता है कि वे एक जादूगरनी थी जिन्हें सांपो के बीच रहने का शौक था। सिकंदर की माता ओलिम्पिया इसके बगल वाले राज्य एपिरुस की राजकुमारी थी। सिकंदर के नाना का नाम राजा निओप्टोलेमस था। सिकंदर की एक बहन भी थी, जिसका नाम क्लियोपैट्रा था। इन दोनों की परवरिश पेला के शाही दरबार में हुईं थी।

सिकंदर की शिक्षा

Sikandar education in Hindi

12 वर्ष की उम्र में सिकन्दर ने घुड़सवारी बहुत अच्छे से सीख ली थी। सिकंदर ने अपनी आरंभिक शिक्षा अपने सबंधि दी स्टर्न लियोनीडास ऑफ़ एपिरुस से प्राप्त की थी। फिर किलिप ने सिकंदर को गणित, घुड़सवारी और धनुर्विध्या सब कुछ समझाने के लिये नियुक्त किया था। लेकिन वो सिकंदर के उग्र एव विद्रोही स्वभाव को नहीं सम्भाल पाए थे।

सिकंदर के दूसरे शिक्षक लाईसिमेक्स थे। उन्होंने सिकंदर के विद्रोही स्वभाव पर अपना काबू किया था। शिक्षक लाईसिमेक्स ने सिकंदर को युद्ध की शिक्षा अच्छे से अच्छी दी थी। सिकंदर जब 13 साल के हुए तब फिलीप ने सिकन्दर के लिए बहुत ही ज्ञानी शिक्षक एरिसटोटल की नियुक्ति की तब एरिस्टोटल भारत में अरस्तु से जाना जाता था।

अरस्तु ने सिकंदर को आगे के तीन साल तक साहित्य की शिक्षा प्रदान की थी। अरस्तु ने सिकंदर को वाक्पटुता भी प्रदान की अलावा सिकंदर को रुझान विज्ञान, दर्शन-शास्त्र और मेडिकल के क्षेत्र में भी ज्ञात कराया था। इन सभी विद्या का सिकंदर के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है,

सिकंदर का युद्ध कौशल

Sikandar fighting skills in Hindi

12 वर्ष की उम्र में सिकंदर ने घुड़सवारी बहुत अच्छे से सीख ली थी और ये उन्होंने अपने पिता को तब दिखाई, जब सिकंदर ने एक प्रशिक्षित घोड़े ब्युसेफेलास को काबू में किया, जिस पर और कोई नियंत्रण नहीं कर पा रहा था। पहले तो वह घोड़ा सिकंदर के काबू से बाहर रहा लेकिन अंत में सिकंदर ने उसपर काबू पा लिया। सिकंदर के पिता को उसपे गर्व हुआ था। उसके बाद सिकंदर ने अपने जीवन के कई युद्धों में बुसेफेल्स की सवारी की,और अंत तक वो घोड़ा उनके साथ ही रहा। 340 ईसा पूर्व में जब सिकंदर जब 16 वर्ष का था तो उसके कौशल को देख उसे मेक्डोनिया राज्य पर अपनी जगह शासन करने के लिए छोड़ दिया था,

जैसे-जैसे मेक्डोनियन आर्मी ने थ्रेस में आगे बढ़ना शुरू किया, मेडी की थ्रेशियन जनजाति ने मेक्डोनिया के उत्तर-पूर्व सीमा पर विद्रोह कर दिया, जिससे देश के लिए खतरा बढ़ गया। सिकंदर ने सेना इकट्ठी की और इसका इस्तेमाल विद्रोहियों के सामने शुरू किया, और तेज़ी से कारवाही करते हुए मेडी जनजाति को हरा दिया, और इनके किले पर कब्ज़ा कर लिया और इसका नाम उसने खुद के नाम पर एलेक्जेंड्रोपोलिस रखा। 2 वर्ष बाद 338 ईसा पूर्व में फिलिप ने मेकडोनीयन आर्मी के ग्रीस में घुसपैठ करने पर अपने बेटे को आर्मी में सीनियर जनरल की पोस्ट दे दी। इस युद्ध में ग्रीक की करारी हार हुई और इससे सिकंदर का नाम पूरे विश्व में होने लगा

सिकंदर का राज्याभिषेक

Sikandar coronation in Hindi

336 ईसा पूर्व में सिकंदर की बहन ने मोलोस्सियन के राजा से शादी की, इसी दौरान एक महोत्सव में पौसानियास ने सिकंदर के पिता राजा फिलिप द्वितीय की हत्या कर दी। अपने पिता की मृत्यु के समय सिकंदर 19 वर्ष का था और उसमें सत्ता हासिल करने का जोश और जूनून चरम पर था। उसने मेकडोनियन आर्मी के शस्यागार के साथ जनरल और फ़ौज को इकट्ठा किया, जिनमें वो सेना भी शामिल थी जो केरोनिया से लड़ी थी। सेना ने सिकंदर को सामन्ती राजा घोषित किया और उसकी राजवंश के अन्य वारिसों की हत्या करने में मदद की।

ओलिम्पिया ने भी अपने पुत्र की इसमें मदद की, उसने फिलिप और क्लेओपटेरा की पुत्री को मार दिया और क्लेओपटेरा को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया। सिकंदर के मेक्डोनिया के सामन्ती राजा होने के कारण उसे कोरिंथियन लीग पर नियंत्रण ही नहीं मिला बल्कि ग्रीस के दक्षिणी राज्यों ने फिलिप द्वितीय की मृत्यु का जश्न मनाना भी शुरू कर दिया और उन्होंने विभाजित और स्वतंत्र अभिव्यक्ति शुरू की। सिकंदर के सत्ता में आते ही उसने पूरी दुनिया में अपना दबदबा कायम कर लिया था।

इसमें सिकंदर की माँ ओलंपिया ने सिकंदर की मदद की। सम्राट बनने के बाद सिकंदर ने अपने पिता की इच्छा को पूरा करने लिए एक विशाल सेना का गठन किया और अपने साम्राज्य को बढाने के लिए सिकंदर ने यूनान के कई भागों पर अधिकार कर अपनी जीत दर्ज की।

इसके पश्चात सिकंदर एशिया माइनर को जितने के लिए निकल पड़ा। इस युद्ध अभियान में सिकंदर ने सीरिया को पराजित करके मिस्र, इरान, मेसोपोटामिया, फिनिशिया जुदेआ, गाझा, और बॅक्ट्रिया प्रदेश को भी पराजित करके अपने कब्ज़े में लिए लिया।

उस समय सभी राज्य फ़ारसी साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था जो सिकंदर के साम्राज्य का लगभग 40 गुना था। इसी दौरान सिकंदर ने 327 ईसा पूर्व में मिस्र में एक नए शहर की स्थापना की। जिसका नाम अपने नाम पर अलेक्ज़ेंड्रिया रखा और यहाँ एक विश्व विद्यालय का भी निर्माण करवाया।

सिकंदर ने अपनी विशाल सेना और कुशल सेना नेतृत्व फ़ारस के राजा डेरियस तृतीय को अरबेला के युद्ध में हराकर स्वयं वहां का राजा बन गया। फ़ारस की राजकुमारी रुकसाना से विवाह करके सिकंदर ने जनता को भी अपनी ओर कर लिया। इसके अलावा सिकंदर ने कई अन्य जगहों पर अपनी जीत हासिल की। इसमें भारत का भी कुछ हिस्सा शामिल था।

सिकंदर की शक्ति का एकीकरण

Consolidation of Alexander Power in Hindi

राजा सिकंदर को राजपाट संभालने को दिया गया। तभी से अपने प्रतिद्वंद्वियों को एक एक करके मारने लगा था। सिकंदर ने उसकी शरुआत अपने चचेरे भाई अमीनटस चौथे को मरवा के की । सिकंदर ने उसने लैंकेस्टीस क्षेत्र के दो मैसेडोनियन राजकुमारों को भी मौत के घाट उतार दिया था।  माना की तीसरे, अलेक्जेंडर लैंकेस्टीस को उन्होंने बक्स दिया था।

ओलम्पियस ने क्लियोपेट्रा ईरीडिइस और यूरोपा को, जोकि फिलिप की बेटी थी, उसको भी जिंदा जला दिया था । जब अलेक्जेंडर को इस बारे में पता चला, तो वह गुस्सा हुई थे । सिकंदर ने अटलूस की हत्या करने का भी आदेश दिया था। वह क्लियोपेट्रा के चाचा और एशिया अभियान की सेना का अग्रिम सेनापति था।

अटलूस डेमोथेन्स एथेंस में से अपने गुन्हेगार होने की संदेह के विषय में चर्चा करने गया था। अटलूस बहुत बार सिकंदर का घोर अपमान कर चुका था। क्लियोपेट्रा की हत्या के बाद, सिकंदर उसे जीवित छोड़ने के लिए बहुत खतरनाक मानता था।  सिकंदर ने एर्हिडियस को छोड़ दिया, लेकिन ओलंपियास द्वारा जहर देने के कारन मानसिक रूप से विकलांग हो चुका था,

फिलिप की मौत की खबर से अनेक राज्यों में विद्रोह होने लगा। उसमे थीब्स, एथेंस, थिसली और मैसेडोन के उत्तर में थ्रेसियन शामिल थे। पुत्र सिकंदर को जब विद्रोह की खबर मिली तो तत्काल उसके ऊपर ध्यान दिया।  सिकंदर ने दिमाग लगाकर, कूटनीति का इस्तेमाल करने कि बजाय सिकंदर ने 3,000 मैसेडोनियन घुड़सवार सेना का गठन कर लिया। और थिसली की तरफ दक्षिण में कूच करने लगा।

सिकंदर का विजय अभियान

conquest of Sikandar in Hindi

Sikandar Biography in Hindiसिकंदर जब अपने उतरी अभियान को खत्म करने के करीब था, तब उसे यह खबर मिली की ग्रीक राज्य के शहर थेबेस ने मेक़डोनियन फ़ौज को अपने किले से भगा दिया हैं,  अन्य शहरों के विद्रोह के डर से सिकंदर ने अपनी सेना के साथ दक्षिण का रुख किया। इन सब घटनाक्रमों के दौरान ही सिकंदर के जनरल परनियन ने एशिया की तरफ अपना मार्ग बना लिया है। अलेक्जेंडर और उसकी सेना थेबेस में इस तरह से पहुंची कि वहां की सेना को आत्म-रक्षा तक का मौका नहीं मिला।

वहीँ सिकंदर से एथेंस के साथ ग्रीक के अन्य शहर भी उसके साथ संधि करने को तैयार हो गए। 334 ईसा पूर्व में सिकंदर ने एशियाई अभियान के लिए नौकायन शुरू किया और उस वर्ष की वसंत में ट्रॉय में पंहुचा। सिकंदर ने ग्रेंसियस नदी के पास पर्शियन राजा डारियस तृतीय की सेना का सामना किया, उन्हें बुरी तरह से पराजित किया। 333 ईसा पूर्व की गर्मियों में सिकंदर की सेना और डारियस की सेना के मध्य एक बार फिर से युद्ध हुआ। हालांकि सिकंदर की सेना में ज्यादा सैनिक होने के कारण उसकी फिर से एक तरफा जीत हुई, और सिकंदर ने खुद को पर्शिया का राजा घोषित कर दिया।

सिकंदर का अगला लक्ष्य इजिप्ट को जीतना था, गाज़ा की घेराबंदी करके सिकंदर ने आसानी से इजिप्ट पर कब्ज़ा कर लिया, 331 ईसा पूर्व में उसने अलेक्जांद्रिया शहर का निर्माण किया और ग्रीक संस्कृति और व्यापार के लिए उस शहर को केंद्र बनाया। उसके बाद सिकंदर ने गौग्मेला के युद्ध में पर्शिया को हरा दिया। पर्शियन आर्मी की हार के साथ ही सिकंदर बेबीलोन का राजा, एशिया का राजा और दुनिया के चारो कोनो का राजा बना गया। सिकंदर का अगला लक्ष्य पूर्वी ईरान था, जहाँ उसने मेक्डोनियन कालोनी बनाई और अरिमाज़ेस में 327 किलोंमीटर पर अपना कब्ज़ा जमाया। प्रिंस ओक्जियार्टेस को पकड़ने के बाद उसने प्रिंस की बेटी रोक्जाना से विवाह कर लिया. उसका विजय अभियान कई वर्षों तक नहीं टूट पाया था।

ग्रैनिकस की लड़ाई

Battle of Granicus in Hindi

यह 334 ईसा पूर्व में आधुनिक पश्चिमी तुर्की में लड़ा गया था। सिकंदर ने पश्चिमी तुर्की के तट पर आगे बढ़ते हुए 20,000 फारसी घुड़सवारों की एक सेना को हराया, शहरों को जीत लिया और फारसी नौसेना को ठिकानों से वंचित कर दिया।

इस्सुस की लड़ाई

Battle of Issus in Hindi

यह महत्वपूर्ण लड़ाई 333 ईसा पूर्व में दक्षिणी तुर्की के प्राचीन शहर इस्सस के पास लड़ी गई थी। फारसियों का नेतृत्व डेरियस III ने किया था। सिकंदर की सेना फारसी सेना के लिए बहुत मजबूत साबित हुई और अंततः डेरियस अपनी सेना के साथ भाग गया।

मिस्र का फिरौन की लड़ाई

Pharaoh of Egypt Battle in Hindi

सिकंदर भूमध्यसागर के पूर्व में दक्षिण की ओर चला गया और फारसियों को उनके नौसैनिक ठिकानों से वंचित कर दिया। हालांकि, कई शहरों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जैसे टायर, जो आधुनिक समय के लेबनान में एक द्वीप पर था, ने सिकंदर को उस पर कब्जा करने के लिए मजबूर किया।

सिकंदर ने मिस्र में प्रवेश किया जो 332 ईसा पूर्व में गाजा पर कब्जा करने के बाद दो शताब्दियों तक फारसी शासन के अधीन था उसने मिस्र के उत्तरी तट पर अलेक्जेंड्रिया शहर की स्थापना की। सिकंदर ने मिस्र की राजधानी मेम्फिस में खुद को फिरौन के रूप में ताज पहनाया था और एक पारंपरिक समारोह के माध्यम से खुद को मिस्र के शासकों की पंक्ति से जोड़ने की कोशिश की थी।

गौगामेला की लड़ाई

Battle of Gaugamela in Hindi

यह 331 ईसा पूर्व में उत्तरी इराक में एरबिल के पास लड़ा गया था। डेरियस को पूरे साम्राज्य से सैनिक मिले। फारसी साम्राज्य की उत्तरी सीमाओं के सीथियन घुड़सवार और शायद आधुनिक पाकिस्तान के भारतीय सैनिकों ने सिकंदर का सामना किया। यह वर्चस्व का युद्ध बन गया और डेरियस भाग गया। उस समय से, फारसी सेना का पतन शुरू हो गया।

सिकंदर का भारत पर आक्रमण

Sikandar invasion of India in Hindi

यूनानी शासक सिकंदर महान ने भारत पर 326 ईसा पूर्व आक्रमण किया। भारत पर आक्रमण करने का मूल कारण धन की प्राप्ति थी। इस समय भारत छोटे-छोटे गणराज्यों में बंटा हुआ था।

सिकंदर खैबर दर्रे से होकर भारत पहुंचा और उसने पहला आक्रमण तक्षशिला के राजा अम्भी पर किया। अम्भी ने कुछ समय के बाद सिकंदर के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और सिकंदर को सहायता देने का वादा किया।

इस समय तक्षशिला में चाणक्य एक आचार्य के रूप में कर कर रहे थे। इसने ये विदेशी हमले देखे ना गए इसलिए चाणक्य ने इसके विरुद्ध में लड़ने के लिए बहुत से राजाओं के पास गए लेकिन आपसी मतभेद के कारण कोई भी सिकंदर के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार नही हुआ। इस समय भारत में मगध का नन्द वश जिसका राजा घनानंद था। जोकि बहुत ही शक्तिशाली था। चाणक्य घनानंद के पास भी गया लेकिन घनानंद ने चाणक्य का अपमान करके उसे महल से निकाल दिया। जिसका परिणाम आगे चलकर घनानंद को उठाना पढ़ा।

328 ईसा पूर्व में सिकंदर भारत में पोरस की सेना से भिड़ा, दोनों की सेना में भयंकर युद्ध हुआ, सिकंदर की सेना ने अपना पूरा जोर लगा दिया था। आखिर में सिकंदर की जीत हुई। सिकंदर पोरस के पराक्रम से बहुत प्रभावित हुआ और उसे वापिस राजा बना दिया। सिकंदर ने सिन्धु के पूर्व की तरफ बढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसकी सेना ने आगे बढने से मना कर दिया और वापिस लौटने को कहा। 325 ईसा पूर्व में सिकंदर ने ठीक होने के बाद अपनी सेना के साथ उत्तर की तरफ पर्शियन खाड़ी के सहारे का रुख किया, उस समय बहुत से लोग बीमार पड़ गए, कुछ चोटिल हो गए, तो कुछ की मृत्यु हो गई। अपने नेतृत्व और प्रभाव को बनाए रखने के लिए उसने पर्शिया के प्रबुद्ध लोगों को मेक्डोनिया के प्रबुद्ध लोगों से मिलाने का सोचा, जिससे एक शासक वर्ग बनाया जा सके। इसी क्रम में उसने सुसा में उसने मेक्डोनिया के बहुत से लोगो को पर्शिया की राजकुमारियों से शादी करवाई।

सिकंदर ने जब 10 हजार की संख्या पर्शियन सैनिक अपनी सेना में नियुक्त कर लिए, तो उसने बहुत से मेक्डोनियन सैनिको को निकाल दिया। इस कारण सेना का बहुत बड़ा हिस्सा उससे खफा हो गया और उनहोंने पर्शियन संस्कृति को अपनाने से भी मना कर दिया। सिकंदर ने तब 13 पर्शियन सेना नायकों को मरवाकर मेक्डोनीयन सैनिकों का क्रोध शांत किया। इस तरह सुसा में पर्शिया और मेक्डोनिया के मध्य सम्बन्धों को मधुर बनाने के लिए किया जाने वाला आयोजन सफल नहीं हो सका। सिकंदर की टक्कर के राजा सिर्फ पोरस ही थे, जिन्होंने सिकंदर को अपनी हार सामने याद दिला थी।

सिकंदर और भारत के राजा पोरस से युद्ध

Battle with Sikandar and King Porus of India in Hindi

तक्षशिला के राजा अम्भी को हराकर सिकंदर झेलम और चिनाब नही को ओर बढ़ा और झेलम नही के किनारे ही सिकंदर और पोरस या पेरू के बीच एक बहुत ही प्रसिद्ध युद्ध लड़ा गया। जिसे हाइडेस्पीज का युद्ध या वितस्ता का युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध में पोरस की हार हुई।

झेलम नही के किनारे सिकंदर और पोरस के बीच भयानक युद्ध की शुरुआत हुई। पहले दिन पोरस ने सिकंदर का डटकर सामना किया। लेकिन मौसम के ख़राब होने के कारण पोरस के सेना कमजोर पड़ने लगी। यह देखकर सिकंदर ने पोरस से आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन पोरस ने हार नही मानी और युद्ध करते रहे। पोरस जानते थे कि उनकी हर निश्चित है लेकिन उन्हें किसी अधीनता स्वीकार नही थी।

राजा पोरस ने अपने दिमाग और बहादुरी से सिकंदर के साथ लड़ाई की। उसके काफी संघर्ष और कोशिशों करने के बाद भी राजा पोरस को हार का सामना करना पड़ा था। इस महायुद्ध के दौरान सिकंदर की सेना को भी भारी नुकसान हुआ था। बहुत सारे महान राजाओ का कहना है।  कि राजा पोरस बहुत ही शक्तिशाली शासक माना जाता था। राजा पोरस का पंजाब में झेलम से लेकर चेनाब नदी तक राजा पोरस का राज्य शासन फैला हुआ था।

सिकंदर और राजा पोरस के युद्ध में पोरस पराजित हुआ था लेकिन सिकंदर को पोरस की बहादुरी ने बहुत ही प्रभावित किया था। क्योंकि राजा पोरस ने जिस तरह लड़ाई लड़ी थी उसे देख सिकंदर दंग रह गए थे। इस युद्ध के बाद सिकंदर ने राजा पोरस से दोस्ती कर ली। उसे उसका राज्य के साथ साथ कुछ नए इलाके भी दिए थे, आखिर कर सिकंदर को कूटनीतिज्ञ समझ थी।

उसी की वजह से आगे किसी तरह की मदद के लिए उसने राजा पोरस से व्यवहारिक तौर पर दोस्ताना संबंध जारी रखे थे। सिकंदर की सेना ने छोटे हिंदू गणराज्यों के साथ भी लड़ाई लड़ी की थी, सिकंदर की कठ गणराज्य के साथ हुई लड़ाई बहुत ही बड़ी थी। कि कठ जाति के लोग अपने साहस के लिए जानी जाती थी।

यहाँ से वह व्यास नदी तक पहुँचा, परन्तु वहाँ से उसे वापस लौटना पड़ा। व्यास नदी के उस पार नंदवंशी के राजा के पास 20 हजार घुड़सवार सैनिक, 2 लाख पैदल सैनिक, 2 हजार 4 घोड़े वाले रथ और करीब 6 हजार हाथी थे। उसके सैनिक मगध के नन्द शासक की विशाल सेना का सामना करने और व्यास नदी को पार करने से इनकार कर दिया। तभी सिकन्दर को फ़ारस के विद्रोह का समाचार मिला, और वह उसे दबाने के लिए वापस चल दिया।

सिकन्दर ने अपने कार्यकाल में ईरान, सीरिया, मिस्र, मेसोपोटामिया, फिनीशिया, जुदेआ, गाझा, बैक्ट्रिया और भारत में पंजाब तक के प्रदेश पर विजय हासिल की थी। सिकन्दर ने सबसे पहले ग्रीक राज्यों को जीता और फिर वह एशिया माइनर (आधुनिक तुर्की) की तरफ बढ़ा। उस क्षेत्र पर उस समय फ़ारस का शासन था। फ़ारसी साम्राज्य मिस्र से लेकर पश्चिमोत्तर भारत तक फैला था। फ़ारस के शाह दारा तृतीय को उसने तीन अलग-अलग युद्धों में पराजित किया, हालाँकि उसकी तथाकथित ‘विश्व-विजय’ फ़ारस विजय से अधिक नहीं थी पर उसे शाह दारा के अलावा अन्य स्थानीय प्रांतपालों से भी युद्ध करना पड़ा था।

सिकंदर के भारत पर आक्रमण का प्रभाव

Effect of Alexander invasion of India in Hindi

सिकंदर के भारत पर आक्रमण करने के कारण भारत पर क्या क्या प्रभाव पड़ा, आइए जानते है :-

  1. सिकंदर के इस भारत विजय अभियान से भारत और यूनान देश के बीच विभिन्न क्षेत्रों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित हुए और साथ भिन्न-भिन्न स्थल और जल मार्गों के रास्ते सामने आया।
  2. सिकंदर के आक्रमण के फलस्वरूप भारत में छोटे-छोटे राज्यों का पतन हुआ और चाणक्य और चन्द्रगुप्त जैसे राष्ट्रप्रेमी सामने आये और छोटे राज्यों को मिला कर बड़े एक बड़े साम्राज्य का निर्माण किया।
  3. भारत में कला के रूप में गंधार शैली का विकास हुआ जो यूनानियों से ही प्रभावित है।
  4. सिकंदर के इतिहासकार मूल्यवान भौगोलिक विवरण छोड़ गए है, जिसके सहायता से इन घटनाओं के समय का पता चलता है, साथ इसकी सहायता कुछ और घटनाओं के समय के बारे में भी जानने को मिलता है।

सिकंदर का असली नाम

Real name of Sikandar in Hindi

सिकंदर का वास्तविक नाम मेसेडोन के एलेक्ज़ेंडर तृतीय (Alexander III of Macedon ) था।  इसके द्वारा किये गए कार्यों के कारण लोग इसे अलग-अलग नामों से जानते थे।

पिता के निधन के बाद जब सिकंदर राजा बना, उसके बाद तो इसके द्वारा बहुत युद्ध जीते गए। इसके वजह से लोगों ने सिकंदर को बहुत से नाम भी दिए।

इन नामों में एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन (Alexander Macedonia) तथा एलेक्ज़ेंडर तृतीय (Alexander III), सिकंदर महान और एलेक्ज़ेंडर द ग्रेट (Alexander The Great) आदि है।

सिकंदर का धर्म

Alexander religion in Hindi

सिकंदर के धर्म के बारे बात करें, तो सिकंदर एक यूनानी या ग्रीक था। यूनानी लोग के अपनी ग्रीक ओलंपियन मान्यताओं के साथ वो कुछ देवताओं में भी विश्वास करते थे, लेकिन ये प्राचीन ग्रीक ओलंपियन मान्यताएं हमें ज्यादा कुछ नही बताती है क्योंकि ये धर्म बहुत ज्यादा व्यवस्थित या केंद्रीकृत नहीं था। इन मान्यताओं को हम सिकंदर का धर्म कह सकते है।

सिकंदर इन मान्यताओं को मानने के बजाय खुद को ईश्वर का रूप मानता था और वो चाहता था कि लोग उसकी पूजा करे। मिस्र को जितने के बाद उनसे वहां के पवित्र तीर्थ स्थल ओरेकल ऑफ़ सिवा (Oracle of Siwa) के दर्शन बे बाद सिकंदर ने स्वयं को Zeus-Ammon का पुत्र घोषित कर दिया।

सिकंदर स्वयं को ईश्वर का रूप मानता था इस बात का पता इससे लगता है, उसके शासन काल में उसने कई ऐसे सिक्के चलवाए जिसमे उसके कानों के ऊपर सींग थे जिस तरह Zeus-Ammon के तस्वीर में होते थे, और उसने Zeus के सामान हाथों में बज्र लिए हुए खड़ा होने वाला चित्र भी सिक्कों पर बनाये थे।

इसके अलावा सिकंदर ने ग्रीक के कई मंदिरों में अपनी मूर्ति स्थापित करने के भी आदेश दिए थे, क्योंकि वो चाहता था कि लोग उसकी पूजा जीवित देवता के रूप में करें।

सिकंदर का पुत्र

Sikandar son Alexander IV in Hindi

सिकंदर महान और रुकसाना का पुत्र अलेक्जेंडर चतुर्थ (Alexander IV) था। इसके जन्म से पहले ही सिकंदर की मृत्यु हो गई। इस कारण जनता के मन उत्तराधिकार को लेकर असंतोष था। इस बात का फायदा उठाते हुए फिलिप III ने पैदल सेना को अपनी ओर कर लिया।

रुकसाना ने बाकियों को राजी किया कि यदि पुत्र होगा तो वो राजा बनेगा अथवा रीजेंट पर फिलिप का राज होगा। 323 ईसा पूर्व या 322 ईसा पूर्व के शुरू में अलेक्जेंडर चतुर्थ (Alexander IV) का जन्म हुआ।

सिकंदर को विश्व विजेता क्यों कहा जाता है

Why is Alexander called the world conqueror in Hindi

सिकंदर को विश्व विजेता इसलिए कहा जाता है। क्योंकि सिकंदर कभी हारा नहीं था। सिकंदर जब पूरी दुनिया पर कब्जा करने के बाद, जब भारत की ओर बढ़ा तब उसने भारत के राजाओं को भी हराया था। हम सभी को पोरस और सिकंदर के बीच होने वाले महान युद्ध का पता है।

सिकंदर की मृत्यु

Alexander death in Hindi

पोरस को हारने के बाद सिकंदर के सामने एक मगध की विशाल सेना थी, लेकिन सिकंदर के सैनिकों ने व्यास नही पार करने और घनानंद की सेना से युद्ध करने से मना कर दिया। तभी सिकंदर को फ़ारस में विद्रोह के बारे में पता चला और उसे विद्रोह को दबाने के लिए सिकंदर ने वापस लौटने का फैसला किया। 323 ईसा पूर्व में वापस लौटे हुए सिकंदर बेबीलोन पहुँगा। बेबीलोन में सिकंदर को भीषण बुखार हुआ और 33 वर्ष की आयु में 10 जून को सिकंदर की मृत्यु बेबीलोन में हुआ।

मात्र 10  वर्षों में ही सिकंदर ने बहुत से राज्यों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। हालाँकि उसकी मृत्यु के बाद उसका साम्राज्य बिखर गया, और इसमें शामिल देश आपस में शक्ति के लिए लड़ने लगे। ग्रीक और पूर्व के मध्य हुए सांस्कृतिक समन्वय का एलेक्जेंडर के साम्राज्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा।

सिकंदर महान या एक क्रुर और अत्याचारी व्यक्ति

Alexander the Great or a cruel and tyrannical person in Hindi

हमारी इतिहास की किताबों में सिकंदर को एक ‘महान योद्धा‘ बताया जाता है और यह भी कि उसने पोरस को युद्ध में हरा दिया था और उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसका राज्य वापिस कर दिया था।

पर इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर ने कभी भी उदारता नहीं दिखाई। वह एक अत्यंत अत्याचारी और शराबी व्यक्ति था। उसने अपने अनेक सहयोगियों को उनकी छोटी सी भूल के लिए तड़पा – तड़पा कर मार डाला था।

एक बार किसी छोटी सी बात के उसने अपने सबसे करीबी मित्र क्लीटोस को मार डाला। अपने पिता के मित्र पर्मीनियन को भी मरवा दिया। उसने अपने गुरू अरस्तू के भतीजे कलास्थनीज़ को मारने में भी संकोच नहीं किया।

प्रसिद्ध इतिहासकार एर्रियर लिखते हैं – जब बैक्ट्रिया के राजा बसूस को बंदी बनाकर लाया गया, तब सिकंदर ने उनको कोड़े लगावाए और नाक – कान कटवा कर बाद में हत्या करवा दी।

सिकंदर ने अपने सैनिकों और सेनापतियों के सामने भी स्वयं के देवता की तरह पेश किया। कुछ उसकी पीठ पीछे उसका मज़ाक भी उड़ाते थे, पर उसके जिंदा रहते हुए उसके सामने आवाज उठाने की हिम्मत किसी ने भी नहीं की।

क्या ऐसा क्रुर सिकंदर, महान पोरस के प्रति उदार हो सकता था? अगर सिकंदर पोरस से जीता होता तो क्या वह उन्हें उनका साम्राज्य वापिस करता?  सच बात तो यह है कि सिकंदर और पोरस के बीच हुए युद्ध को उसके चापलूस लेखकों ने उसकी जीत में बदल कर एक कहानी गढ़ दी और सिकंदर को महान करार दे दिया।

सिकंदर से जुड़े रोचक तथ्य

Interesting facts about Sikandar in Hindi

ऐसा माना जाता है कि जब सिकन्दर का जन्म हुआ था इफेसेस के डायाना के मन्दिर में भयंकर आग लग गयी थी जो उस समय विश्व के सात अजूबो में से एक माना जाता था। सिकन्दर के जन्म को अपशकुन मानते हुए ज्योतिषियों में भविष्यवाणी करते हुए कहा कि एशिया को खत्म करने वाली ताकत का जन्म हो गया है। इस तरह बचपन में ही उसके महान शासक होने के भविष्यवाणी हो गयी थी।

सिकंदर के मृत्यु के बाद जब उसकी अरथी ले जाया जा रहा था, तब अरथी के बाहर सिकंदर के दोनों हाथ बाहर लटके हुए थे। क्यूंकी उसने मृत्यु से पहले कहा था की जब मेरी मृत्यु हो जाए तो मेरे हाथ अरथी के भीतर मत करना, सिकंदर चाहता था उसके हाथ अरथी के बाहर रहें ताकि सारा दुनिया यह देख ले कि उसके हाथ भी खाली हैं। जिसने दुनिया जितनी चाही थी, जिसने अपने हाथ में सब कुछ भर लेना चाहा था, वह हाथ भी खाली हैं, यह दुनिया देख लें। जैसा इंसान खाली हाथ दुनिया मे आता हैं वैसे ही खाली हाथ उसे जाना भी, चाहे वो कितनो महान बन जाए।

सिकंदर से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर (Sikandar FAQ)

Some important questions related to Sikandar and their answers in Hindi

प्रश्न :- महान शासक सिकंदर कौन था

उत्तर: – सिकंदर का पूरा नाम अलेक्जेंडर तृतीय और अलेग्जेंडर मेसडोनियन था। जो की अलेक्जेंडर द ग्रेट या सिकंदर, फिलिप द्विर्तीय का बेटा था। सिकंदर के पिता मेक्डोनिया और ओलम्पिया के राजा थे। जिसका जन्म 20 जुलाई, 356 इस प्राचीन पूर्व में नेपोलियन की राजधानी पेला में हुआ था।

प्रश्न :-सिकंदर का जन्म कहाँ हुआ था ?

उत्तर: – राजा सिकंदर का जन्म पेला में हुआ था

प्रश्न :- सिकंदर का पुत्र कौन था ?

उत्तर: – राजा सिकंदर चतुर्थ, मैसेडोन हेराकल्स और मैसेडोनथा उनके पुत्र थे।

प्रश्न :- सिकंदर को सिकंदर महान क्यों कहा जाता है?

उत्तर: – सिकंदर को उसके उत्कृष्ट सैन्य आक्रमणों के कारण ‘महान’ कहा जाता था जिसने यूरोपीय लेखकों को चकित कर दिया था, 30 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य की स्थापना की थी जो आधुनिक पश्चिमी और मध्य एशिया में फैला हुआ था।

मैसेडोनिया के राजा के रूप में, उसने सात राष्ट्रों और 2,000 से अधिक शहरों को जीतकर लगभग 1,000 मील की यात्रा की थी, माना जाता है कि सिकंदर किसी भी युद्ध में बिना किसी विजय के मारा गया था।

प्रश्न :- सिकंदर भारत में कब आया था?

उत्तर: – सिकंदर यानि अलेक्जेंडर द ग्रेट का भारतीय अभियान 326 ईसा पूर्व में शुरू हुआ।

प्रश्न :-क्या सिकंदर महान ने भारत पर आक्रमण किया था?

उत्तर: – मैसेडोनिया के राजा, सिकंदर महान ने उस भूमि पर आक्रमण किया जिसे यूनानियों ने भारत (वर्तमान पाकिस्तान) कहा था, लगभग 326 ईसा पूर्व में अपने अभियान के अंत में दुनिया को जीतने के लिए जब वह ग्रीस, भूमध्यसागरीय, सीरिया, मिस्र, फारस और मध्य एशिया, कई स्वदेशी राजवंशों को उखाड़ फेंका और उनकी जगह ग्रीक लेफ्टिनेंटों को लाया।

प्रश्न :- सिकंदर और पोरस राजा के बिच हुआ युद्ध किस नामसे जाना जाता है?

उत्तर: – सिकंदर और पोरस के बिच हुआ युद्ध हैडास्पेस से जाना जाता है।

प्रश्न :- सिकंदर के पत्नियों के नाम क्या थे?

उत्तर: – रोक्साना, स्टैटिरा द्वितीय और पेरासेटिस द्विर्तिय।

प्रश्न :- सिकंदर के घोड़े का नाम क्या था?

उत्तर: – सिकंदर के घोड़े का नाम  बुसेफेल्स था।

प्रश्न :- सिकंदर ने शिक्षा किनसे प्राप्त की थी? सिकंदर के गुरु कोन थे?

उत्तर: – सिकंदर ने शिक्षा एरिस्टोटल जिन्हें भारत का अरस्तु कहा जाता है वही सिकंदर के गुरु भी थे।

प्रश्न :- सिकंदर को हराने वाला कौन था?

उत्तर: – तक्षशिला के राजा ने सिकंदर के आगे घुटने टेक दिए और सिकंदर से पोरस पर आक्रमण करने के लिए कहा ताकि उनका राज्य विस्तार हो सके. लेकिन पोरस ने वीरता के साथ लड़ाई लड़ी और काफ़ी संघर्ष के बाद पराजय हुई. इसमें सिकंदर की सेना को भी भारी नुक़सान पहुंचा

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