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ताजमहल की इतिहास निर्माण रहस्य विवाद और रोचक तथ्य | History of Taj Mahal Controversy and Interesting Facts in Hindi


आज के इस पोस्ट मे ताजमहल की इतिहास निर्माण रहस्य विवाद और रोचक तथ्य History of Taj Mahal Controversy and Interesting Facts in Hindi के बारे मे जानेगे।

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ताजमहल की इतिहास निर्माण रहस्य विवाद और रोचक तथ्य

History of Taj Mahal Controversy and Interesting Facts in Hindi

History of Taj Mahal Controversy and Interesting Facts in Hindiताजमहल अपनी बेमिसाल खूबसूरती और भव्यता की वजह से दुनिया के सात अजूबों में से एक है। ताजमहल को मोहब्बत की मिसाल माना जाता है। यह मुगल शासक शाहजहां और उनकी सबसे चहेती बेगम मुमताज महल के अटूट प्रेम की याद दिलवाता है। आगरा में स्थित ताजमहल की सुंदरता को देखने दूर-दूर से सैलानी आते हैं और इसके अद्भत सौन्दर्य को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। ताजमहल, भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसकी वजह से भारत में टूरिज्म को भी काफी बढ़ावा मिला है। वहीं ताजमहल को इसके आर्कषण की वजह से विश्व धरोहर की लिस्ट में भी शामिल किया गया है।

जैसे ही हम भारत के आगरा शहर का नाम सुनते हैं, सबसे पहले हमारे जहन में ताजमहल ही आता है. सफ़ेद संगमरमर से बना यह महल, असीम प्रेम की निशानी है. ताजमहल का निर्माण मुग़ल शासक शाहजहाँ ने करवाया था. यह दुनिया के सात अजूबों (Seven Wonders of The World) में से एक है. ताजमहल को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है. यह विश्व धरोहर के रूप में पूरे विश्व द्वारा सराहे जाने वाला “अतिउत्तम मानवीय कृतियों” में से एक कहलाया गया. ताजमहल के निर्माण के पीछे बेहद रोचक कहानी है,

इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की याद में करवाया। इस अति उत्तम कृति के बारे में ऐसा माना जाता है कि शाहजहाँ ने इसका निर्माण करवाने के बाद अपने सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिये, ताकि कोई और दूसरा इस ताजमहल जैसी कोई इमारत नहीं बना पाये. मध्यकालीन भारत में निर्मित वास्तुकला के नायाब नमूनों में एक ताजमहल सबसे अनूठा है। मोहब्बत की निशानी समझी जाने वाली यह इमारत पूरी दुनियां में अपनी सुंदरता के लिए मशहूर है, जिसका देश विदेश के तकरीबन 70 से 80 लाख सैलानी प्रतिवर्ष दीदार करने आते हैं। ताजमहल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में यमुना नदी के तट पर मौजूद है,

वास्तुकला में भारत की समृद्धि को प्रदर्शित करती यह खूबसूरत इमारत वर्ष 1983 से यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2007 में इसे विश्व के सात नए अजूबों की श्रेणी में भी पहला स्थान दिया गया है। नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका जानकारी ज़ोन में जहाँ हम विभिन्न विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण तथा रोचक जानकारी आप तक आसान शब्दों में साझा करते हैं। आज इस लेख में हम ऐतिहासिक महत्व की इस धरोहर तथा इसके इतिहास को विस्तार से समझेंगे। तो आइए जानते हैं ताजमहल के इतिहास से लेकर इसकी वास्तुकला, आर्कषण और भव्य बनावट के बारे में (Taj Mahal ke Bare Mein) पूरी जानकारी देते है।

ताज महल का इतिहास

History of Tajmahal in Hindi

हम सभी ने ताजमहल के बारे में थोड़ा बहुत तो सुना ही होगा. जो लोग इसे देख कर आए हैं, उन्हें एक बार फिर ताजमहल को देखने की चाहत होगी और जिन्होने इसे नहीं देखा वे जरूर यहाँ जाने की इच्छा रखते होंगे. तो आइये जानते हैं ताजमहल से जुड़ी उसके रोचक इतिहास को जानते है,

भारत में मुगलों का आगमन 1526 ईस्वी में पानीपत के प्रथम युद्ध जो बाबर एवं इब्राहीम लोदी के मध्य लड़ा गया से हुई। शाहजहाँ मुगल साम्राज्य का ही पाँचवां शासक था। इसके पूर्ववर्ती शासकों में शाहजहाँ के पिता जहाँगीर, अकबर, हुमायूँ तथा बाबर शामिल थे। शाहजहाँ का जन्म सन 1592 में लाहौर में हुआ, उसके बचपन का नाम खुर्रम था। उसकी माँ जोधपुर के शासक उदयसिंह की पुत्री जगत गुसाई थी, जिसका बाद में नाम जोधाबाई हुआ।

शाहजहां का 30 साल (1628-1658) का शासन काल रहा | शाहजहां एक बहादुर और बुद्धिमान तथा दूरदर्शी शासक था| इनके पिता का नाम जहांगीर तथा इनके दादा का नाम अकबर था | शाहजहां को 4 पुत्र दाराशिकोह ,शाहशुजा, मुरादबख्श और औरंगजेब थे | 1627 में जहांगीर की लाहौर में मृत्यु होने के बाद प्रजा की मांग पर शाहजहां को सिंहासन पर बैठा दिया गया | शाहजहां के शासनकाल को मुगल वंश के स्वर्ण कालीन युग के रूप में जाना जाता है| इतिहासकारों का मानना है कि उनके शासनकाल में लड़ाइयां बहुत कम होती थी राजकोष हमेशा धन से भरा रहता था प्रजा शांति से रहती थी | अपने पिता के आदर्शों का पालन करते हुए एक अच्छे न्यायाधीश और प्रजा के लिए कुशल शासक का अच्छा छवि बना लिया था | शाहजहां ने दिल्ली का लालकिला, दीवाने आम, दीवाने खास, दिल्ली की जामा मस्जिद, आगरा की मोती मस्जिद बनवाई |

खुर्रम उर्फ शाहजहां ने 1612 ईसवी में अरजुमंद बानो बेगम (मुमताज महल) से उनकी खूबसूरती से प्रेरित होकर निकाह किया था। जिसके बाद वे उनकी सबसे प्रिय और पसंदीदा बेगम बन गईं थी। मुगल बादशाह शाहजहां अपनी बेगम मुमताज महल को इस कदर प्यार करता था कि वह एक पल भी उनसे दूर नहीं रह सकता था, यहां तक की वह अपने राजनैतिक दौरे में भी उनको अपने साथ लेकर जाता था और मुमताज बेगम की सलाह से ही अपने राज-काज से जुड़े सभी फैसले लेता था और मुमताज की मुहर लगने के बाद ही शाही फरमान जारी करता था।

वहीं 1631 ईसवी में मुमताज महल जब अपनी 14वीं संतान को जन्म दे रही थीं, तभी अत्याधिक प्रसव पीड़ा की वजह से उनकी मौत हो गई थी। वहीं शाहजहां अपने प्रिय बेगम की मौत से अंदर से बिल्कुल टूट गया था, और इसके बाद वह काफी गमगीन रहने लगा था, फिर उसने अपने प्रेम को सदा अमर रखने के लिए ”मुमताज का मकबरा” बनाने का फैसला लिया था, जो कि बाद में ताजमहल के नाम से मशहूर हुआ। इसलिए, इसे शाहजहां और मुमताज के बेमिसाल प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है।

कहते है की मुमताज महल के शव को उस समय शाहजहां के चाचा दानियाल द्वारा तापी नदी के तट पर जैनाबाद गार्डन में दफनाया गया था। मुमताज की मृत्यु का शाहजहा को काफी दुख हुआ। वह एकांत में रहने लगे। शाहजहां बुरहानपुर के पीछे ही अपने सैन्य दल के साथ रहने लगे और वही रहते हुए उन्होने मुमताज महल कि याद में एक मकबरा बनाने की योजना बनाई। और फिर दिसंबर 1631 को मुमताज महल के शव को जैनाबाद की कब्र से निकाल कर एक सोने से बने ताबूत में रखकर यमुना नदी के तट पर एक छोटे से घर में रखा गया। जब मकबरा तैयार हो गया तो उसमे मुमताज महल के शव को दफनाया गया। और इसका नाम मुमताज महल रखा गया जो आगे चलकर ताजमहल के नाम से पुरी दुनिया में जाना जाने लगा। जो आज भी अपनी मुहब्बत की निशानी, सुंदरता और स्थापत्य कला का लौहा सारी दुनिया से मनवा रहा है,

वैसे तो ताजमहल के निर्माण का कार्य तो 1631 में शुरू हुआ था। परंतु इसके इतिहास की शुरूआत माना जाए तो मुगलवंश के पांचवे शासक शाहजहां से शुरू होती है। जिसने इस अनमोल नगीने का निर्माण कराया था। शाहजहां को निर्माताओ का राजकुमार भी कहा जाता है। जिसने अपने शासनकाल में अनेक इमारतो का निर्माण करवाया। शाहजहां के द्वारा बनाई गई इमारतो में दिल्ली का लाल किला, दीवाने आम, दीवाने खास, दिल्ली की जामा मस्जिद, आगरा की मोती मस्जिद, आगरा का ताजमहल आदि प्रमुख है। इससे यह साबित होता है की शाहजहां को भव्य निर्माण कराने का बहुत शौक था।

ताजमहल कब बना और इसके निर्माण समय और कुल खर्च

When was the Taj Mahal built and its construction time and total cost in Hindi

मोहब्बत की मिसाल माने जाने वाले ताजमहल का निर्माण काम करीब 23 साल के लंबे समय के बाद पूरा हो सका था। सफेद संगममर से बने ताजमहल की नक्काशी और सजावट में छोटी-छोटी बारीकियों का ध्यान रखा गया है। यही वजह है निर्माण के इतने सालों बाद आज भी लोग इसकी खूबसूरती के कायल है और यह दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है।

ताजमहल का इतिहास और ताजमहल की मुहब्बत की दांस्ता जितनी खुबसूरत और रोचक है। उतनी ही रोचक ताजमहल के बनने की की दास्तां है। 1631 में इस भव्य इमारत के बनाने की योजना बनाई गई थी।

सर्वप्रथम इसके आर्किटेक्स, डिजाइन और पर्यवेक्षण के लिए एक टीम बनाई गई। जिसमे शिराज (इरान) के अमानत खान जो मुख्य सुलेखक थे। दिल्ली के चिरंजीलाल जो किमती पत्थरो के जानकार और मुख्य सजावटी मूर्तिकार थे। मुहम्मद हनीफ राजगारो के मुख्य पर्यवेक्षक थे और अब्दुल करीम मैमूर खान और मकरामत खान निर्माण स्थल पर दैनिक निर्माण के आर्थिक प्रबंधक थे। और इस कमेटी के मुख्य अधिक्षक उस्ताद खान लाहौरी को नियुक्त किया गया। कहते है कि ताजमहल का नक्शा खुद शाजहां ने बनाया था (यह अगल बात है कि इसके लिए उसने उस समय के इंजिनिंयरो, वास्तुकारो, शिल्पकारो की मदद ली हो।

कुछ इतिहिसकार मानते है कि नक्सा बनाने के लिए नवीस उस्ताद इंशा की मदद मुख्य रूप में ली गई थी, ताजमहल के लिए जगह का चुनाव भी खुद शाहजहां ने ही किया था। जगह का चुनाव यमुना नदी के तट पर किया गया ताकि आगरा के किले से जब भी शाहजहां को मुमताज की याद आये तो वह किले से ही ताजमहल का दिदार कर सके। जिस स्थान का चयन किया गया वह जगह आमेर के राजा की थी जिनसे शाहजहां वह जगहा खरीदी और बदले में आमेर के राजा को उस जमीन के टुकडे से चार गुना ज्यादा जमीन दी गई थी।

मुहब्बत की इस विशाल इमारत को बनाने के लिए 20 हजार मजदूरो और चुन चुन कर बेहतरीन राजगीरो को उत्तर भारत से भर्ती किया क्या। इन मजदूरो और कामगारो के रहने के मुमताजाबाद बसाया गया। भारी समानो और पत्थरो के बडे बडे बलॉक को ढोने के लिए 1000 हाथियो और बैलो को लगाया गया था। 20-30 बैलो वाली गाडियो से बडे बडे पत्थरो को लाया जाता था। ताजमहल मे जडे हीरे रत्न व किमती व मूल्यवान पत्थरो को विदेशो से मगंवाया गया था। ऐसा नही है की ताजमहल यूहीं बनकर तैयार हो गया यह एक बहुत बडा प्रोजैक्ट था जिस पर पूरे तरिके व युद्ध स्तर पर कार्य किया गया था। जिसकी आर्थिक देखरेख के लिए एक कोषाध्यकक्ष भी नियुक्त किया गया था। ताजमहल को बनाने में उस समय के चार करोड, चौरासी लाख, पैंसठ हजार एक सौ छियासठ (48465166) रूपए की लागत आई थी,

हालांकि  ताजमहल को बनाने वाले मजदूरों से संबंधित यह मिथ भी जुड़ा हुआ है कि ताजमहल का निर्माण काम पूरा होने के बाद मुगल शासक शाहजहां ने सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे। ताकि दुनिया में ताजमहल जैसी अन्य इमारत नहीं बन सके। वहीं ताजमहल के दुनिया के सबसे अलग और अद्भुत इमारत  होने के पीछे एक यह भी बड़ा कारण बताया जाता है।

ताजमहल का रहस्य एवं वास्तुकला

The Mystery and Architecture of the Taj Mahal in Hindi

आगरा में स्थित ताजमहल अपने आप में अनुपम और अद्भुत स्मारक है, जो कि अपनी अप्रितम वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यह सफेद संगममर पत्थरों से बनी एक बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है, जो कि भारतीय, इस्लामिक, मुगल और परसी वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।

ताज महल कई ढांचों का एकीकृत परिसर है जिसमें सफेद संगमरमर से बना मकबरा है, जहां मुगल बादशाह शाहजहां और उनकी तीसरी बेगम मुमताज महल की मज़ार (जो की अपने चौदहवें बच्चे के प्रसव के दौरान मर गयी थी। ) है। मुगल साम्राज्य ने भारतीय उपमहाद्वीप में कई मकबरे बनवाए लेकिन ताज महल उनमें सबसे ज्यादा बेहतरीन है। यह मकबरा एक उंचे आधार पर पूरी तरह से सफेद संगमरमर से बना है जिसमें चार मीनारें हैं, जो कि हर कोने पर स्थित हैं।

मकबरे के दोनों ओर एक मस्जिद और एक गेस्ट हाउस है। ताज महल के सामने एक ‘चारबाग’ शैली का बाग है जिसमें बीच में एक पैदल रास्ता और फव्वारे हैं, इसके साथ ही देखने के लिए प्लेटफाॅर्म और दोनों ओर हरी खुली जगह और पेड़ हैं। इस परिसर में आने के लिए एक विशाल सजावटी दरवाजा है जिसमें कुरान के अभिलेख हैं, और हस्तलिपी लाइन है ‘हे आत्मा, तू ईश्वर के पास विश्राम कर। ईश्वर के पास शांति के साथ रह और उसकी परम शांति तुझ पर बरसे।’

ताजमहल को बनाने में प्राचीन मुगल परंपराओं समेत पार्शियन वास्तुशैली का बेहद ध्यान रखा गया था। बेमिसाल प्रेम का प्रतीक माने जाने वाला ताजमहल अपनी भव्यता, खूबसूरती और आर्कषण की वजह से दुनिया के सात अजूबों में से एक है। मुगलकाल में बने इस ऐतिहासिक स्मारक, ताजमहल के निर्माण में बहुमूल्य एवं बेहद महंगे सफेद संगममर के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है।

मुगल शासकों ने अपने शासनकाल के दौरान ज्यादातर ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में लाल बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया था, लेकिन ताजमहल के निर्माण में सफेद संगममर के पत्थरों का इस्तेमाल अपने आप में खास है, जो कि इसकी खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देते हैं।

इस बेहद सुंदर और आर्कषण इमारत के निर्माण में करीब 28 अलग-अलग तरह के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। जो कि हमेशा चमकते रहते हैं और कभी काले नहीं पड़ते। वहीं कई पत्थरों की यह भी खासियत है कि यह चांद की रौशनी में चमकते रहते हैं। वहीं शरद पूर्णिमा के दौरान पत्थरों के चमकने से ताजमहल की शोभा और भी अधिक बढ़ जाती है।

दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक ताजमहल की दीवारों पर बेहद खूबसूरत नक्काशी की गई है। इस भव्य स्मारक को बनाने में छोटे-छोटे पहलुओं को ध्यान में रखकर इसे बेहद आर्कषित और शाही डिजाइन दी गई है, इसलिए मुगल काल में बनी यह ऐतिहासिक धरोहर, प्रसिद्ध विश्व धरोहरों की सूची में शामिल है।

भारतीय-इस्लामिक वास्तुकला के इस अद्भुत ऐतिहासिक इमारत के बाहर बेहद सुंदर लाल पत्थरों से बना एक काफी ऊंचा दरवाजा है, जो कि बुलंद दरवाजा नाम से मशहूर है। ताजमहल के शीर्ष पर करीब 275 फुट ऊंची विशाल गुंबद बनी हुई है, जो कि इसके आर्कषण को और भी अधिक बढ़ाती है। इसके अलावा अन्य कई छोटी-छोटी गुंबद भी बनी हुई है।

ताजमहल की गुंबद के नीचे दो बेमिसाल प्यार करने वाले प्रेमी मुमताज और शाहजहां की कब्र भी बनी हुई हैं, लेकिन इन कब्रों को वास्तविक नहीं समझा जाता है। इनकी असली समाधि नीचे तहखाने में बनी हुई है, जहां आमतौर पर जाने की अनुमति नहीं है। अर्धगोलाकार आकार में बने ताजमहल की सुंदरता और भव्यता को देखकर हर कोई मंत्रमुंग्ध हो जाता है और इसकी तरफ खींचा चला आता है।

ताज महल की संरचना

Structure of Taj mahal in Hindi

ताजमहल के बाहरी संरचना की बात करें तो यह तकरीबन 42 एकड़ के परिसर में फैला है जिसका मुख्य आकर्षण मुमताज़ महल का मकबरा या मुख्य इमारत है। मुख्य इमारत के अतिरिक्त परिसर का प्रवेश द्वार, अन्य इमारतें (ताजमहल मस्जिद, अतिथि गृह आदि) चार बाग, मीनारें, छतरियाँ सभी मिलकर इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाती हैं।

ताज महल का मुख्य इमारत / मकबरा

The main building and mausoleum of the Taj Mahal in Hindi

ताजमहल का मुख्य आकर्षण इसका मकबरा (History of Taj Mahal in Hindi) है जो एक 23 फिट ऊँचे चबूतरे पर बनाया गया है। यह एक सममितीय इमारत है जिसमें एक मेहराब रूपी मुख्य द्वार है। मुख्य मेहराब के ऊपर एक विशाल गुंबद मौजूद है। मुख्य मेहराब के दोनों ओर एक के ऊपर दूसरा शैली में दो-दो अतिरिक्त मेहराब निर्मित हैं। इसी शैली में कक्ष के चारों किनारों पर दो-दो मेहराब (एक के ऊपर दूसरा) बने हैं जो इस इमारत को एक समरूपता प्रदान करते हैं।

इसके चारों कोनों पर एक-एक मीनार बनाई गई है, जो मुख्य ढाँचे को स्थिरता प्रदान करने का कार्य करती हैं। सभी मीनारें बाहर की ओर झुकी हुई हैं जिस कारण ये देखने पर सीधी दिखाई पड़ती हैं। इसके अलावा इन मीनारों का बाहर की ओर झुके होने का एक कारण यह भी है कि किसी आपदा जैसे भूकंप आदि की स्थिति में ये मीनारें मुख्य ढांचे में गिरकर उसे क्षतिग्रस्त न कर सकें।

ताजमहल का प्रवेश द्वार

Entrance of taj mahal in Hindi

ताजमहल का मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 93 फीट ऊँचा है। यह द्वार भी बारीक जड़ाई एवं नक्काशी का उत्कृष्ट नमूना है। गेट पर मौजूद लाल बलुआ पत्थर की सतह पर सफेद संगमरमर और कीमती पत्थरों की जड़ाई का कार्य बारीकी से किया गया है। द्वार के शीर्ष पर दो ऊँचे स्तंभों के बीच ग्यारह गुंबद हैं ताजमहल के प्रवेश द्वारा से ही ताजमहल परिसर के निर्माण में लगे वर्षों की संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दरवाजे के बाहरी भाग में कुरान की कुछ आयतें सफेद संगमरमर की सतह पर अच्छी तरह से अंकित हैं। इसके अतिरिक्त मुख्य द्वार आगंतुकों को प्रकाशीय भ्रम भी प्रदान करता है, जैसे ही कोई व्यक्ति मुख्य द्वार से ताज (History of Taj Mahal in Hindi) के पास पहुंचता है मकबरा व्यक्ति से दूर जाता हुआ प्रतीत होता है जबकि मुख्य द्वार से बाहर की तरफ आने पर मकबरा बड़ा होता जाता है।

ताजमहल के चारों कोने पर बनी खूबसूरत मीनारें

Beautiful minarets built on the four corners of the Taj Mahal in Hindi

हिन्दू, मुस्लिम और मुगलकालीन वास्तुकला की इस अद्धितीय स्मारक ताजमहल  के चारों कोनों पर करीब 40 मीटर ऊंचाई वाली सुंदर मीनारें बनी हुईं हैं, जो कि इसकी सुंदरता को और अधिक बढ़ा रही हैं। वहीं यह मीनारें अन्य मीनारों की तरह एकदम सीधी नहीं होकर थोड़ी सी बाहर की तरफ झुकी हुई हैं।

इन चारों मीनारों का निर्माण कुछ इस तरह किया गया है कि यह चारों मीनार हल्की सी बाहर की तरफ झुकी हुई हैं. इनका बाहर की तरफ झुकाव के पीछे यह तर्क रखा गया कि, इमारत के गिरने की स्थिति में यह मीनारें बाहर की तरफ ही गिरे, जिससे की मुख्य ताजमहल की इमारत को कोई नुकसान न पहुंचे.

ताजमहल मस्जिद एवं अतिथि गृह

Taj Mahal Mosque & Guest House in Hindi

परिसर में मकबरे के पश्चिम में मौजूद ताज मस्जिद इस परिसर की भव्यता को बढ़ाने का कार्य करती है। मस्जिद का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है जिसमें कुछ स्थानों पर सफेद आयताकार संगमरमर की जड़ाई की गई है। परिसर में मस्जिद का निर्माण मुस्लिम मान्यता के अनुसार किया गया है जिसके तहत प्रत्येक मकबरे के पास प्रार्थना स्थल होना अनिवार्य था।

मस्जिद जैसी एक अन्य इमारत का निर्माण मस्जिद के ठीक सामने की तरफ अथवा मकबरे के पूर्व की ओर किया गया है जो एक अतिथि गृह या मेहमान खाना है। ये दोनों लगभग एक समान दिखने वाली इमारतें पूरे ताजमहल परिसर की वास्तुकला को पूर्ण सममित संतुलन प्रदान करती हैं।

अतिथि गृह को “नक्कर खाना” या “जवाब” के रूप में भी जाना जाता है। इसे मुख्यतः मुमताज महल की मृत्यु की वर्षगांठ पर मेहमानों के लिए एक विश्राम गृह के रूप में उपयोग किया जाता था। यह उन लोगों के लिए एक सभा स्थल के रूप में भी काम करता था जो मस्जिद में या सीधे मृतक की कब्र पर प्रार्थना करने आते थे।

ताजमहल की खूबसूरत उद्यान

Beautiful gardens of taj mahal in Hindi

दुनिया के 7 अजूबों में से एक ताजमहल की सुंदर नक्काशी और कारीगरी की वजह से यह अपने आप में अद्धितीय है,लेकिन इसकी खूबसूरती को इसके परिसर में बने हरे-भरे बगीचे और भी ज्यादा बढ़ा रहे हैं।

ताजमहल के बाहर चार सुंदर बगीचे बने हुए हैं, जो कि इसके दोनों तरफ फैले हुए हैं। वहीं यहां आने वाले सैलानी ताजमहल की खूबसूरती को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, और इस पल को हमेशा के लिए संजोने के लिए एवं इसे और ज्यादा खास बनाने के लिए तस्वीरें भी लेते हैं।

ताजमहल में बनी छतरियां

Umbrellas made in Taj mahal in Hindi

मोहब्बत की मिसाल माने जाने वाला इस भव्य इमारत की विशाल गुंबद को सहारा देने के लिए छोटे-छोटे आकार की सुंदर छतरियां बनाई गईं हैं, इनके आधार से शाहजहां की बेगम मुमताज महल के मकबरे पर शानदार रोश्नी पड़ती है, जो कि देखने में बेहद आर्कषक लगती है।

ताजमहल के ऊपर बना सुंदर कलश

Beautiful Kalash above the Taj Mahal in Hindi

दुनिया की इस सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक धरोहर ताजमहल के शीर्ष पर बनी विशाल गुंबद पर एक कांसे के द्धारा निर्मित बेहद खूबसूरत कलश बना हुआ है। वहीं इस कलश के ऊपर चंद्रमा की खूबसूरत आकृति भी बनी हुई है, इस कलश की नुकीले नोंक और चंद्रमा की आकृति एक त्रिशूल जैसी प्रतीत होती है, जो कि हिन्दू धर्म की मान्यता के मुताबिक भगवान शिव के चिन्ह को दर्शाती हैं।

ताजमहल में लिखे गए सुंदर लेख

Beautiful articles written in Taj Mahal in Hindi

भारत की शान माने जाने वाली इस भव्य इमारत पर मौजूद लेख फारसी और फ्लोरिड ठुलूठ लिपि में लिखे गए हैं, जिसमें कई सूरों को वर्णित किया गया है, वहीं इस सूरा में कुरान की कई आयतें मौजूद हैं।

जैसे ही आप ताजमहल के द्वार से ताजमहल में प्रवेश करते हैं, आप एक अलग ही शांति का अनुभव करते हैं. इसके द्वार पर बहुत ही सुंदर सुलेख है, हे आत्मा ! तू ईश्वर के पास विश्राम कर, ईश्वर के पास शांति के साथ रहे तथा उसकी पूर्ण शांति तुझ पर बरसे.”

ताजमहल की बाहरी संरचना एवं सजावट

Exterior structure and decoration of Taj Mahal in Hindi

ताजमहल अपनी अनुपम वास्तुकला और सुंदर बनावट के लिए दुनिया भर में मशूहर है। यह भारतीय, इस्लामिक, मुगल और परसी वास्तुकला का अद्धितीय उदाहरण है। जिसकी बेहद सुंदर नक्काशी की गई है और कई छोटी-छोटी बारीकियों को ध्यान में रखकर इसे तराशा गया है।

मुमताज महल के इस भव्य मकबरे का अति विशाल गुंबद आसाधरण रुप से एक बड़े ड्रम पर टिका हुआ है, जिसकी कुल ऊंचाई 44.41 मीटर है।

आंतरिक प्रारुप एवं सजावट: मुमताज महल के इस भव्य मकबरे के नीचे एक तहखाना भी है, आम तौर पर सैलानियों को यहां जाने की अनुमति नहीं है।  इस कब्र के नीचे करीब 8 कोने वाले 4 अलग-अलग कक्ष है। इस कक्ष के बीचों-बीच शाहजहां और मुमताजमहल की भव्य और आर्कषित कब्रे हैं।

दुनिया की इस सबसे खूबसूरत इमारत के अंदर शाहजहां की कब्र बाईं तरफ बनी हुई हैं, जो कि मुमताज महल की कब्र से कुछ ऊंचाई पर है और  विशालकाय गुंबद के ठीक नीचे बनी हुई है। जबकि मुमताज महल की कब्र संगमरमर की जाली के बीच में स्थित है, जिस पर बेहद खूबसूरत तरीके से पर्शियन में कुरान की आयतें लिखी हैं।

इन दोनों खूबसूरत कब्रों को कीमती रत्नों से सजाया गया है और इन कब्रों के चारों तरफ संगमरमर की जालियां बनी हुईं है। वहीं इस भव्य इमारत का अंदर ध्वनि का नियंत्रण अति उत्तम है।

विश्व धरोहर और प्रमुख पर्यटन स्थल के रुप में ताजमहल

Taj Mahal as a world heritage and major tourist destination in Hindi

ताजमहल, अपनी अद्भुत वास्तुकला और  सुंदरता की वजह से पूरी दुनिया भर में मशहूर है। इसकी विशालता और खूबसूरती को देखने दुनिया के कोने-कोने से सैलानी यहां आते हैं और इसकी खूबसूरती की तारीफ करते हैं। दुनिया के सात अजबूों में एक और शाहजहां और मुमताज की बेमिसाल मोहब्बत का प्रतीक माने जाने वाला ताजमहल दुनिया के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में से भी एक हैं।

यहां हर साल लाखों की तादाद में न सिर्फ देश से बल्कि विदेशों से ही पर्यटक आते हैं। ताजमहल, भारत सरकार का पर्यटन से होने वाली आय का मुख्य स्त्रोत भी है, शाहजहां द्धारा निर्मित इस भव्य ताजमहल को इसकी भव्यता और आर्कषण की वजह से साल 2007 में दुनिया के 7 अजूबों में शामिल किया गया था।

ताज महल का महत्व

Importance of Taj mahal in Hindi

ताज महल का भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल वास्तुकला के प्रतीक के तौर पर बड़ा महत्व है। इस मकबरे और इसके परिसर के आसपास के भवन मुगल इतिहास और मुगल वास्तुकला दोनों के सबक हैं। सुलेखों, जटिल नक्काशी, भवनों के सही अनुपात और निर्माण की सटीक ज्यामितीय के अध्ययन से कोई भी ना सिर्फ उस समय के शिल्प कौशल पर हैरान हो जाएगा, बल्कि इस कालातीत चमत्कार के पीछे की प्रेरणा पर भी। इतिहास के विद्वान, वास्तुकार, कपड़े और गहनों के डिजाइनर, चित्रकार और फोटोग्राफर सब को इस प्रेम के स्मारक और खूबसूरत आश्चर्य के ऐतिहासिक मकबरे से प्रेरणा मिली है।

ताज महल का महत्व सिर्फ भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल वास्तुकला के प्रतीक के तौर पर ही नहीं है, बल्कि मुगल काल और हाल के दिनों के दूसरे स्मारकों की प्रेरणा के तौर पर भी है। ताज महल से प्रेरित कुछ अन्य इमारते हैं: महाराष्ट्र के औरंगाबाद में बीबी का मकबरा, बांग्लादेश में ढाका के पास सोनारगांव में सन् 2008 में बनी ताज महल की प्रतिकृति, विस्कान्सिन में त्रिपोली मंदिर जो कि कोई धार्मिक इमारत नहीं है बल्कि मूरों की पुनरुद्धार वास्तुकला का उदाहरण है और अमेरिका के अटलांटा शहर में बना ट्रम्प ताज महल जो कि एक कैसीनो है।

ताजमहल से जुड़ी अफवाह एवं सच

Rumors and truths related to Taj Mahal in Hindi

ताजमहल से जुड़े कुछ मिथ आज हम सच मान बैठे है, हम यहाँ पर उन्ही मिथ की सच्चाई बताने जा रहे हैं –

काले ताज का मिथक

Black crown myth in Hindi

एक मिथक यूरोपीय यात्री जीन बैप्टिस्ट से जुड़ा है जिसने सन् 1665 में आगरा की यात्रा की थी। उन्होंने दावा किया था कि शाहजहां ताज महल जैसा ही एक मकबरा काले संगमरमर से बनवाना चाहते थे। हालांकि अपने बेटे औरंगजैब द्वारा अपदस्थ किए जाने से वह अपना यह सपना पूरा नहीं कर पाए। इस सिद्धांत का कोई पुरातात्विक प्रमाण नहीं है। ताज महल परिसर में चांदनी बाग में मरम्मत के दौरान पुरातत्वविदों ने 2006 में एक वैकल्पिक वर्णन दिया, जिसमें साफ सरोवर शामिल था। सफेद संगमरमर के मकबरे की छाया रात में गहरी दिखती थी। यह गहरा प्रतिबिंब मकबरे के बिलकुल संतुलन में है, जिससे ताज महल से जुड़े इस काले मकबरे के मिथक को बल मिलता है।

शिल्पकारों और कारीगरों के अंगभंग से जुड़ा मिथक

Myths related to the mutilation of craftsmen and artisans in Hindi

आम जनधारणा के विपरीत ऐसा कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है जो इन कहानियों को सच साबित कर सके कि वास्तुविदों को अंधा कर दिया गया था, इसे बनाने वाले मजदूरों के हाथ कटवा दिए गए थे या दोबारा ऐसा अजूबा बनाने से रोकने के लिए वास्तुकारों को मकबरे की उंचाई से फेंक दिया गया था। एक अन्य मिथक के दावे के अनुसार सभी कारीगरों से इस अनुबंध पर हस्ताक्षर करवाए गए थे कि वो दोबारा ऐसा स्मारक नहीं बना सकें। हालांकि इस बात का भी कोई सबूत नहीं है,

ये मिथक कि ब्रिटिश इसे तोड़कर ताज के टुकड़े बेचना चाहते थे

The myth that the British wanted to break it and sell pieces of the Taj in Hindi

इस किस्से के अनुसार गवर्नर जनरल आफ इंडिया लार्ड विलियम बेटींक ताज महल को तोड़कर उसके संगमरमर के टुकड़े बेचना चाहते थे। जीवनी लेखक जान रोसेली ने इस किस्से का एक कारण यह बताया कि बेंटींक ने स्थानीय प्रशासन के लिए धन जुटाने के लिए आगरा किले के संगमरमर के कुछ टुकड़े बेचे थे।

एक हिंदू राजा द्वारा ताज महल बनवाने का किस्सा

The story of a Hindu king building the Taj Mahal

ताज महल के इर्द गिर्द कई कहानियां घूमती हैं कि ताज महल मुगल स्मारक नहीं है बल्कि वह शाहजहां के समय से पहले भी मौजूद था। इस किस्से को लेकर कोई प्रमाण नहीं है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट दोनों ही इस विचार से संबंधित याचिकाएं ठुकरा चुके हैं।

ताजमहल से जुड़े रोचक तथ्य

Interesting facts about Taj Mahal in Hindi

तो चलिये अब ताजमहल से जुड़े रोचक तथ्य (Interesting facts about Taj Mahal in Hindi) से जुड़े रोचक तथ्यो को जानते है –

  • मुगलकाल में बनी ताजमहल की इमारत इकलौती ऐसी इमारत है, जिसका निर्माण सफेद संगमरमर के पत्थरो्ं से किया गया है। इस भव्य स्मारक के निर्माण में करीब 23 साल का लंबा वक्त लगा था, जिसे न सिर्फ भारतीय मजदूर बल्कि तुर्की और फारस के मजदूरों ने भी बनाया था।
  • ताजमहल को “मुमताज़ का मकबरा” भी कहते हैं. मुमताज़ महल की मृत्यु के बाद शाहजहाँ बहुत गमगीन हो गए. तब उन्होने अपने प्रेम को जिंदा रखने के लिए अपनी पत्नी की याद में ताजमहल बनवाने का निर्णय लिया.
  • आगरा में स्थित ताजमहल एक ऐसी लकड़ी के आधार पर बनाया गया है, जिसे मजबूत बनाए रखने के लिए नमी की जरूरत होती है, और इस नमी को यमुना नदी बनाकर रखती है।
  • दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक ताजमहल जाने वाले मुख्य मार्ग के बीच जो फव्वारे लगाए गए हैं, वे किसी पाइप से नहीं जुड़े हैं, बल्कि हर फव्वारे के नीचे एक तांबे का टैंक है, यह सभी टैंक एक ही समय पर भरते हैं, और प्रेशर पड़ने पर इसमें पानी भी छोड़ते हैं।
  • मुगल सम्राट शाहजहां ताजमहल की तरह ही एक काला ताजमहल बनवाना चाहता था, लेकिन इससे पहले शाहजहां को उसके निर्दयी बेटे औंरगेजब ने बंधक बना लिया था, जिससे उसकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी।
  • ताजमहल को बनाने के लिए करीब 8 अलग-अलग देशों से सामान लाया गया था। और इसकी निर्माण सामग्री ढोने के लिए करीब 1500 हाथियों का सहारा लिया गया था।
  • औरंगाबाद में इस भव्य और ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल का डुप्लीकेट यानि की प्रतिकृति बनी हुई है, जो कि ‘मिनी ताज’ के नाम से मशहूर है। वास्तविक में यह ”बीवी का मकबरा” है।
  • ताजमहल के निर्माण का श्रेय पांचवें मुग़ल शासक शाहजहाँ को जाता है. शाहजहाँ ने भारत पर 1628 से 1658 तक शासन किया. शाहजहाँ ने अपनी सभी पत्नियों में प्रिय पत्नी मुमताज़ महल की याद में ताजमहल का निर्माण करवाया.
  • 1631 के बाद ही शाहजहाँ ने आधिकारिक रूप से ताजमहल का निर्माण कार्य की घोषणा की तथा 1632 में ताजमहल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया.
  • ताजमहल के निर्माण में काफी समय लगा. वैसे तो इस मकबरे का निर्माण 1643 में ही पूरा हो गया था, परंतु इसके सभी पहलुओं के काम करते करते इसे बनाने में लगभग दस साल और लग गए.
  • सम्पूर्ण ताजमहल का निर्माण 1653 में लगभग 320 लाख रुपये की लागत में हुआ, जिसकी आज की कीमत 52.8 अरब रुपये (827 मिल्यन डॉलर) है.
  • इसके निर्माण में 20,000 कारीगरों ने मुग़ल शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहौरी के अधीन कार्य किया. कहते हैं कि इसके निर्माण के बाद शाहजहाँ ने अपने सभी कारीगरों के हाथ कटवा दिये.
  • द्वितीय विश्वयुद्ध तथा भारत पाकिस्तान युद्ध(1965 और 1971) के समय ताजमहल को कपड़े और  बांस की  लकड़ियों से ढक दिया गया था ताकि इसे दुश्मन के हमलों से बचाया जा सके इस काम को करने में पुरातत्व विभाग को लगभग 20 दिन लग गए थे|
  • शाहजहां ताजमहल की तरह एक काला ताजमहल भी बनवाना चाहता था लेकिन इससे पहले उसके बेटे औरंगजेब ने बंधक बना लिया जिससे उसकी ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी|
  • ताजमहल जाने वाले रास्ते में जो फव्वारे लगाए गए हैं वह किसी पाइप से नहीं जुड़े हैं बल्कि हर फव्वारे के नीचे एक टैंक बना है यह सभी टैंक एक समय पर भरते हैं और प्रेशर पड़ने पर इसमें से पानी निकलते हैं |
  • आपको एक बात जानकर आश्चर्य होगा कि ताजमहल लकड़ियों से मिलकर बना हुआ है यह एक ऐसी प्रकार की लकड़ी है जिसको मजबूत रहने के लिए नमी की जरूरत पड़ती है और यह नमी यमुना नदी से मिलता है इन लकड़ियों को |
  • एक और आश्चर्य होगा की  ताजमहल कुतुब मीनार से 5 फुट ऊंचा है | आप में से बहुत सारे लोगों को यह बात नहीं पता होगा |यदि आप से पूछा जाए कि ताजमहल ऊंचा या कुतुब मीनार ? आपका उत्तर हमेशा होना चाहिए कि ताजमहल ऊंचा होगा |
  • ताजमहल का रंग बदलता रहता है सुबह गुलाबी रात को दूधिया सफेद और चांदनी रात में सुनहरा दिखाई देता है लेकिन बढ़ते प्रदूषण के कारण ताजमहल का रंग हल्का पीला पड़ने लगा है इसलिए सरकार के आदेश अनुसार इसके आसपास डीजल पेट्रोल के वाहन पर रोक लगा दी गई है |
  • ताजमहल वर्ल्ड में एक दिन में सबसे ज्यादा देखी जानी वाली इमारत है। ताजमहल को एक दिन में लगभग 12000 सैलानी देखते है।
  • ताजमहल की कलाकृति में 28 तरह के किमती पत्थरो को लगाया गया है।
  • ताजमल की चारो मीनारे एक दूसरे की ओर झूकी हुई है।
  • शाहजहां ने जब पहली बार ताजमहल का दीदार किया तो उसने कहा ” ये सिर्फ प्यार की कहानी बयां नही करेगा। बल्कि उन सबको दोष मुक्त भी करेगा जो इस पाक जमीं पर अपने कदम रखेगें और चांद सितारे इसकी गवाही देंगें।

ताजमहल कैसे पहुचें

How to reach Taj mahal in Hindi

आइए अब देखते हैं इस बेहद खूबसूरत इमारत तक किस प्रकार पहुँचा जा सकता है। यह उत्तरप्रदेश राज्य के अगर शहर में मौजूद है, यहाँ हवाई, रेल तथा सड़क तीनों मार्गों से पहुँच जा सकता है। ताजमहल (History of Taj Mahal in Hindi) से खेरिया अथवा आगरा हवाई अड्डे तक यात्रा करने में लगभग 12 मिनट लगते हैं। ताजमहल और हवाई अड्डे के बीच लगभग 10 किमी की दूरी है। आगरा को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली रेलगाड़ियों का भी एक अच्छा नेटवर्क है,

नजदीकी रेलवे स्टेशन आगरा छावनी है। दिल्ली के साथ आगरा को जोड़ने वाली मुख्य रेलगाड़ियां पैलेस ऑन व्हील्स, शताब्दी, राजधानी और ताज एक्सप्रेस हैं। वहीं सड़क परिवहन की बात करें तो आगरा से कई महत्वपूर्ण शहरों के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। नजदीकी बस अड्डा इदगाह और आईएसबीटी बस स्टैंड से दिल्ली, जयपुर, मथुरा, फतेहपुर-सीकरी आदि के लिए नियमित बसें चलती हैं।

यदि आप रेल मार्ग द्वारा आगरा जा रहे है तो आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से ताजमहल की दूरी लगभग 2.5 किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से ताजमहल के लिए आटो और रिक्शा वालो की काफी भीड लगी रहती है। अगर आपके पास भारी लगेज नही है तो आप आगरा के किले का बाहरी भाग के दर्शन करते हुए किले के सामने से होते हुए शिवाजी चौक से ताजमहल पहुंच सकते है। शिवाजी चौक से ताजमहल का सेप्रेट रास्ता गया है जो पश्चिमी गेट पर जाता है। कार, टैक्सी या आटो से आने वाले यात्री भी इसी मार्ग से जाते है। इसी सेपरेट मार्ग पर कुछ दूरी पर ताजमहल कार पार्किग है।

ताजमहल कार पार्किग से ताजमहल की दूरी लगभग 700-800 मीटर है। आप चाहे एयर पोर्ट से टैक्सी से जाएं या रेलवे स्टेशन से आटो से जाएं या फिर अपनी कार से जाएं पहुंचना आपको कार पार्किग में ही है। कार पार्किंग पर पहुंचते ही आपको ऊंट गाडी और बैट्री गाडी वाले घेर लेगें। क्योकि कार पार्किंग से ताजमहल के बीच की इस दूरी में बैट्री गाडयां व ऊंट गाडियां चलती है। जो बीस से तीस रूपये प्रति सवारी लेते है। कार पार्किग से आगे किसी भी तरह के प्राइवेट वाहनो के जाने की अनुमति होती है। आप कार पार्किग से ताजमहल गेट तक पैदल भी जा सकते है। 700 मीटर की दूरी कोई ज्यादा नही होती है।

ताजमहल पर विवाद

Controversy over Taj Mahal in Hindi

इलाहाबाद कोर्ट में ताजमहल के बंद कमरों को खोलने की याचिका दायर की गई है। जिसमें ये कहा गया है कि, इसके 22 कमरे खुलवाये जाए और उनकी सही तरीके से जांच की जाए। दायर याचिका में इस बात का दावा किया गया है कि, इसमें हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां हैं। आपको बता दें कि, सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आई है उसके मुताबिक, ये याचिका अयोध्या में बीजेपी के मीडिया प्रभारी की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने एऐसआई से सवाल करते हुए कहा कि, ये कमरे क्यों बंद हैं। इसका कोई कारण है? उन्होंने यही सवाल मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर से भी पूछा। जिसके जवाव में सुरक्षा कारण का मुद्दा निकलकर आया। अब यही कारण है इसके बंद होने का या फिर कुछ और इसका पता याचिका की सुनवाई और जांच के दौरान ही पता लगेगा।

तो आपको यह पोस्ट ताजमहल की इतिहास निर्माण रहस्य विवाद और रोचक तथ्य History of Taj Mahal Controversy and Interesting Facts in Hindi कैसा लगा कमेंट मे जरूर बताए और इस पोस्ट को लोगो के साथ शेयर भी जरूर करे…

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