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मोहम्मद गोरी का इतिहास जीवन परिचय भारत पर आक्रमण और मृत्यु | History of Muhammad Ghori in Hindi

आज के इस पोस्ट मे मोहम्मद गोरी की जीवनी इतिहास History of Muhammad Ghori in Hindi के बारे मे जानेगे। इतिहास में कुछ लोग हमेशा याद किए जाते हैं, जब भी बात भारतीय इतिहास में पृथ्वीराज चौहान की बात सामने आती है तो सबसे पहले मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के किस्से जरूर आते है, तो चलिये यहा मोहम्मद गोरी का इतिहास जीवन परिचय युद्ध भारत पर आक्रमण और मृत्यु History of Muhammad Ghori in Hindi Biography Jeevan Parichay Date Of Birth, Birth Place, Father, Mother, Wife Children, Fight, Death जानेगे.

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मोहम्मद गोरी का इतिहास जीवन परिचय भारत पर आक्रमण और मृत्यु

History of Muhammad Ghori in Hindi

History of Muhammad Ghori in Hindiभारतीय इतिहास में मोहम्मद गौरी की गिनती महानतम शासकों में होती है। मोहम्मद गौरी एक निर्भीक और साहसी अफगान योद्धा था, जिसने गजनी साम्राज्य के अधीन गोर नामक राज पर अपना सिक्का चलाया था। वहीं भारत में तुर्क साम्राज्य की स्थापना का श्रेय भी मोहम्मद गोरी को ही दिया जाता है। मोहम्मद गोरी एक अपराजित विजेता और सैन्य संचालक भी था।

मोहम्मद गौरी के बचपन का नाम शहाबुद्दीन था जिसे मुइज़ अल-दीन के नाम से भी जाना जाता था, मुईजुद्दीन मुहम्मद बिन साम, जिसे सामान्यतया मुहम्मद गोरी के नाम से जाना जाता है। उसके पिता का नाम बहाउद्दीन साम था। वह ‘गोर’ प्रदेश के शंसबानी वंश से सम्बन्धित था। ‘गोर’ राज्य गज़नी और हेरात के बीच पहाड़ियों पर स्थित था, जो आधुनिक अफ़गानिस्तान का पश्चिम-मध्य भाग था। 1009 ई० में गज़नी के शासक महमूद गज़नवी ने ‘गोर’ प्रदेश पर विजय प्राप्त कर ली और इसकों अधीनस्थ साम्राज्यवादी राज्य बना दिया।

मुहम्मद बिन कासिम के बाद महमूद गजनवी और फिर उसके बाद मोहम्मद गोरी ने क्रूरता के साथ भारत में लूटपाट की और आक्रमण किया। हालांकि गौरी का मकसद भारत में मुस्लिम राज्य को स्थापित करना था। इसके लिए मोहम्मद गोरी ने पूरी योजना के साथ साल 1179 से 1186 के बीच पहले पंजाब पर अपना आधिपत्य जमाया था और फिर 1179 में स्यालकोट को भी अपने अधीन कर लिया था।

इसके बाद अफगान शासक मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चैहान तृतीय के क्षेत्र भटिण्डा (तबरहिन्द) पर भी जबरदस्ती अपना कब्जा जमा लिया था, जिसके चलते बाद में चौहान वंश के शासक एवं साहसी और वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी के बीच युद्ध हुआ था। वहीं भारतीय इतिहास में दोनों ही योद्धाओं के बीच हुए युद्द काफी चर्चित रहे,

इतिहास में उन्हें घुरिद वंश के सबसे महान शासकों में से एक के रूप में जाना जाता है, वह पहले मुस्लिम शासक था, जिसने भारतीय उपमहाद्वीप में इस्लामी साम्राज्य की नींव रखी, उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों पर शासन किया जो आधुनिक दिनों में पाकिस्तान के रूप में जाने जाते हैं, उत्तर भारत,  ईरान, बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान, इसलिए, वह मध्य एशिया में एक प्रसिद्ध शासक था। ऐसे शासको के बारे में जानकारी होना बहुत जरुरी है तो आज के इस लेख में आपको मोहम्मद गौरी के इतिहास और उनकी लड़ाइयों के बारे में जानेंगे।

मोहम्मद  गोरी का जीवन परिचय

Muhammad Ghori Biography in Hindi

  • पूरा नाम (Name) :- मुइज़ुद्दीन मुहम्मद ग़ौरी
  • शासनावधि नाम (Reign name) :- सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद ग़ौरी
  • उपनाम (Nick Name ) :- शिहाबुद्दीन  ,मोहम्मद गौरी ,गोर के मोहम्मद
  • जन्मदिन (Birthday) :- साल 1149
  • जन्म स्थान (Birth Place)  :- गोर, घुरिद साम्राज्य (वर्तमान अफगानिस्तान )
  • जीवन काल उम्र (Age ) :-  वर्ष 56-57 (मृत्यु के समय )
  • मृत्यु की तारीख (Date of Death) :- 15 मार्च 1206
  • मृत्यु का स्थान (Place of Death ) :- धमियाक, झेलम जिला, घुरिद साम्राज्य (वर्तमान पाकिस्तान )
  • मृत्यु का कारण (Reason Of Death) :- हत्या कर दी गई थी
  • मकबरा (Tomb ) :- धमियाक, झेलम जिला, वर्तमान पाकिस्तान
  • पिता का नाम (Father) :- बहालुद्दीन साम प्रथम
  • भाई का नाम (Brother) :- गयासुद्दीन मुहम्मद
  • वंश (Linage) :- घुरिद वंश
  • धर्म (Religion) :- इस्लाम
  • पेशा (Occupation) :-अफगानी राजा, योद्धा
  • शासनकाल (Reign) :- 1173–1202 (अपने भाई ग़ियासुद्दीन मुहम्मद के साथ), 1202–1206 (बतौर एकल शासक)
  • पराजय (Defeat) :- पृथ्वीराज चौहान से लगातार 17 बार
  • वैवाहिक स्थिति Marital Status :- शादी के बारे में कोई लेख मौजूद नहीं

मोहम्मद  गोरी का जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

Birth and Early life of Muhammad Ghori in Hindi

भारतीय इतिहास के इस महान योद्धा के जन्म तिथि के बारे में कोई पुख्ता प्रमाण तो नहीं है, लेकिन कुछ महान इतिहासकार 1149 ईसवी में घोर प्रांत (अफगानिस्तान) में उनका जन्म मानते थे। आपको बता दें कि मुइज़ अद-दिन मुहम्मद का जन्म शिहब अद-दिन के नाम से हुआ था जो बाद मोहम्मद ग़ोरी के नाम से विख्यान हुआ,

मोहम्मद गौरी का जन्म 1149 ईस्वी में वर्तमान अफगानिस्तान के घुर क्षेत्र में हुआ था। उनके जन्म की सही तारीख अज्ञात है। उनके पिता बहाउद्दीन प्रथम घुर के स्थानीय शासक थे। मोहम्मद गौरी के बड़े भाई गयासुद्दीन मुहम्मद थे,

प्रारंभिक जीवन में, उनके चाचा अलाउद्दीन हुसैन ने उन दोनों को पकड़ लिया। लेकिन बाद में उनके चाचा अलाउद्दीन हुसैन बेटे सैफुद्दीन मुहम्मद ने उन्हें रिहा कर दिया, साल 1183 में सैफुद्दीन मुहम्मद की मृत्यु के बाद, घुरीद अभिजात वर्ग ने मोहम्मद गौरी के बड़े भाई गयासुद्दीन का समर्थन किया और सत्ता हासिल करने में उनकी सहायता की।

गयासुद्दीन ने फिर मुइज़ुद्दीन को इस्तियन और कज़ुरान का शासन दिया। मोहम्मद गौरी के बड़े भाई ने अपने भाई गयासुद्दीन को कई गोरी नेताओं को हराने में मदद की, जो सिंहासन के लिए होड़ में थे।

मुहम्मद गोरी का युद्ध अभियान

War campaign of Muhammad Ghori in Hindii

मुहम्मद गौरी के आक्रमण का उद्देश्य महमूद गजनवी के आक्रमणों से अलग था। मुहम्मद गोरी के बड़े भाई गयासुद्दीन को अपने चाचा फखरुद्दीन मसूदके के अंदर सत्ता की लालसा दिखाई दी, जिन्होंने खुद के लिए सिंहासन का दावा किया था और हेरात के सेल्जूक गवर्नर तदज अल-दीन यिल्दिज़ और बल्ख के साथ गठबंधन किया था ।

गयासुद्दीन ने मुहम्मद गोरी की सूझ बुझ से हेरात और बल्ख के सेल्जुक गवर्नर ताजुद्दीन इल्दिज़ की सेना को राग-ए-जार नामक स्थान पर हराया, युद्ध के दौरान सेल्जुक गवर्नर मारा गया और इस लड़ाई में गयासुद्दीन की जीत हुई और गयासुद्दीन ने सबसे पहले मुहम्मद गोरी को छुड़ाया जो उसके चाचा अलाउद्दीन हुसैन ने बंदी बनाया हुआ था।

इस लड़ाई की वजह से गयासुद्दीन और मुहम्मद गोरी ने जमींदार, बगिया और गुज्जन पर विजय प्राप्त की और गयासुद्दीन ने मुहम्मद गोरी को बामियान (अफगानिस्तान में) के शासक के रूप में बहाल किया

वर्ष 1173, यह वर्ष मुहम्मद भाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था क्योंकि उन्होंने अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया और गजनी राजवंश पर आक्रमण किया, और ओघुज तुर्क को हराया , ओघुज ने गजनविद शहर पर कब्जा कर लिया था। मुहम्मद गोरी के बड़े भाई गयासुद्दीन को गजनी का शासक नियुक्य किया गया।

गोरी वंश की नींव और गजनी साम्राज्य की जिम्मेदारी

The foundation of the Ghori dynasty and the responsibility of the Ghazni Empire in Hindi

इतिहासकारों के मुताबिक 12वीं शताब्दी के बीच गोरी वंश का उदय हुआ, गोरी राजवंश की स्थापना गोरी के चाचा अला-उद-दीन जहांसोज ने की थी, जिसकी मौत के बाद परिवारवाद प्रथा के मुताबिक उसका पुत्र सैफ-उद-दीन गोरी ने राज-पाठ संभाला।

वहीं अला-उद-दीन जहांसोज ने शहाबुद्धीन मोहम्मद गोरी और उसके भाई गियासउद्दीन को कई सालों तक कैद कर रखा था, लेकिन सैफ-उद-दीन ने अपने शासनकाल में इन दोनों को आजाद कर दिया था।

वहीं सैफ-उद-दीन की मृत्यु के बाद गियासउद्दीन को शासक बनाया गया, हालांकि फिर 1173 ईंसवी में मुहम्मद गौरी को गजनी साम्राज्य के अधीन गौर राज्य का शासक बनाया गया।

शासक के रुप में मोहम्मद गोरी

Mohammad Ghori as ruler in Hindi

मोहम्मद गौरी एक अफगान योद्धा था, जिसने अपने राज में कई तुर्क सेवादार रखे हुए थे, जिनको गौरी ने अच्छी सैन्य और प्रशासनिक शिक्षा भी दी थी, जिसकी वजह से गोरी अपनी गुलाम तुर्क सेना का भरोसा जीतने में सफल रहा था। वहीं उसकी सेना में कई ऐसे सैनिक भी थे, जो मोहम्मद गोरी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने तक को तैयार थे।

मोहम्मद गोरी ने अपने सैनिकों की मद्द से अफगानिस्तान के आस-पास के राज्यों में अपना अधिकार जमा लिया था और बाद में उसने गजनी को अपनी राजधानी बनाया था।

मोहम्मद गोरी का भारत पर आक्रमण

Muhammad Ghori invasion of India in Hindi

अफगानिस्तान पर विजय प्राप्त करने के बाद उसने सोचा कि अब हमें भारत पर आक्रमण करना चाहिए तो हम भारत की संपत्ति पर कब्जा कर लेंगे लेकिन धीरे-धीरे वह सोचने लगा कि मैं भारत में एक साम्राज्य स्थापित कर सकता हूं।

भारत पर हमला करने के सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक यह था कि ख्वारज़्मियन साम्राज्य बढ़ रहा था जो एक महान और शक्तिशाली फ़ारसी साम्राज्य था, और वह जानता था कि अगर उसने कुछ नहीं किया तो ख्वारज़्मियन साम्राज्य घुरिद साम्राज्य को बर्बाद कर देगा।

मुहम्मद गौरी एक कभी नहीं हार मानने वाला विजेता योद्धा और कुशल अफगान सेनापति था, जिसका भारत पर आक्रमण कर भारत को जीतने का उद्देश्य मोहम्मद कासिम और महमूद गजनवी के उद्देश्यों से अलग था। मोहम्मद गोरी न सिर्फ भारत पर लूटपाट कर भारत पर अपना सिक्का चलाना चाहता था, बल्कि उसका मुख्य उद्देश्य भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना करना था, इसलिए भारतीय इतिहास में तुर्क साम्राज्य का संस्थापक मोहम्मद गोरी को ही माना गया है।

भारत पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए मोहम्मद गौरी ने सबसे पहले साल 1175 में मुल्तान पर उस समय हमला किया, जब वहां शिया मत को मानने वाले करामाता शासन कर रहे थे। हालांकि गौरी ने मुल्तान पर जीत हासिल की। इसके बाद पूरे भारत में इस्लामिक राज्य की स्थापना करने के उद्देश्य से गौरी ने साल 1178 ईसवी में गुजरात पर आक्रमण किया,

मोहम्मद गोरी ने भारत पर अधिकार करने का अपना सपना साकार करने के मकसद से साल 1179 से 1186 के बीच पंजाब पर फतह हासिल की। वहीं जिस समय उसने पंजाब पर आक्रमण किया जब पंजाब में महमूद शासक शासन संभाल रहे थे, इस तरह गौरी ने उन्हें हराकर पंजाब पर कब्जा कर लिया।

इसके बाद उसने पेशावर, स्यालकोट, और फिर लाहौर और भटिण्डा में जीत हासिल की। इस तरह मोहम्मद गौरी ने एक के बाद एक पंजाब के ज्यादातर क्षेत्रों में अपना अधिकार जमा लिया, जिसके चलते मोहम्मद गौरी का उत्तरी भारत के मैदानी भू-भागों में आगे बढ़ने के लिए रास्ता तो साफ हो गया, लेकिन मोहम्मद गोरी के राज्य की सीमा दिल्ली और अजमेर के महान शासक पृथ्वीराज चौहान के राज्य से लगी हुई थी, इसलिए भारत पर अपन अधिकार जमाने के मकसद से आगे बढ़ने के लिए गोरी को महान पराक्रमी योद्धा पृथ्वीराज चौहान से दुश्मनी मोड़ लेनी पड़ी।

वहीं ऐसा भी कहा जाता है कि पृथ्वीराज के शत्रु राजा जयचंद ने मोहम्मद गोरी को पृथ्वीराज से युद्ध करने के लिए उकसाया और वादा किया कि वे गोरी की इस युद्द में मद्द करेंगे। इसके बाद मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच भीषण युद्ध हुआ।

मुहम्मद गौरी का गुजरात पर आक्रमण और पराजय

Invasion and defeat of Muhammad Ghori in Gujarat in Hindi

मुल्तान और उच्छ पर अधिकार करने के लिए मुहम्मद गोरी ने 1178 ई० में राजस्थान की मरुभूमि को पार करता हुआ गुजरात में प्रवेश करने का प्रयास किया लेकिन गुजरात के शासक भीम द्वितीय ने आबू पर्वत के निकट हुए युद्ध में मुहम्मद गोरी को बुरी तरह पराजित किया। मुहम्मद गोरी किसी तरह जान बचाकर अपनी सेना सहित गुजरात से भाग निकला।

हालांकि गुजरात के शासक ने गौरी की नापाक चाल को नाकाम कर उसे गुजरात से खदेड़ दिया। यह गौरी की पहली हार थी, जिससे सबक लेकर मोहम्मद गोरी ने भारत में अपने विजय अभियान के मार्ग में परिवर्तन कर पंजाब की तरफ से भारत में अपना अधिकार जमाने के प्रयास किए।

गज़नी साम्राज्य के विरुद्ध पेशावर अभियान

Peshawar campaign against the Ghazni Empire in Hindi

मुहम्मद गोरी ने अब पंजाब के मार्ग से भारत में प्रवेश करने का फैसला किया। इस दृष्टि से 1179-80 ई० में उसने फुरशोर (पेशाकर) पर आक्रमण किया, जो उस समय संभवतः गज़नी की साम्राज्य के अधीन था और उस पर विजय प्राप्त की। 1181-1184 ई० के बीच तीन महत्त्वपूर्ण अभियानों द्वारा उसने सियालकोट के दुर्ग पर अधिकार कर लिया। हुसेन बिन खर्मेल को दुर्ग का अधिकारी नियुक्त किया।

1186 ई० में भारतवर्ष में गज़नवी सत्ता के अन्तिम अवशेष नष्ट करने के लिए मुहम्मद गोरी ने लाहौर पर आक्रमण कर विजय प्राप्त करके शासक खुसरो मलिक को बंदी बना लिया और गार्जिस्तान में बालाखाना नामक दुर्ग में भेज दिया जहाँ 1192 ई० में उसकी हत्या कर दी गयी। मुहम्मद गोरी ने अपने सिपहसालार (सैनिक अधिकारी) और वली अली कर्मख को लाहौर का राज्यपाल नियुक्त किया।

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच पहला युद्ध – तराइन का प्रथम युद्ध (1191)

First battle between Muhammad Ghori and Prithviraj Chauhan in Hindi (First Battle of Tarain)

साल 1191 में थानेश्वर के पास तराइन के मैदान में पृथ्वीराज और मोहम्मद गौरी के बीच पहला युद्ध हुआ, उसने तराइन पर आक्रमण करने की पूरी रणनीति बनाई लेकिन आक्रमण करने से पहले उसने पृथ्वीराज चौहान को कूटनीति के माध्यम से मोड़ने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहा।

फिर 1191 में तराइन का पहला युद्ध शुरू हुआ जिसमें मोहम्मद गौरी को पृथ्वीराज चौहान ने पराजित किया क्योंकि पृथ्वीराज चौहान के पास गोरी की तुलना में बहुत बड़ी सेना थी, जिसमें, मोहम्मद गौरी को हार का सामना करना पड़ा। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान द्धारा मोहम्मद गौरी को बंधक बना लिया गया, हालांकि पृथ्वीराज चौहान ने बाद में उसे छोड़ दिया, गोरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच हुआ यह युद्ध तराइन का प्रथम युद्द के नाम से मशहूर है।

इस युद्ध में, पृथ्वीराज चौहान के बेटे  गोविंद राज ने वास्तव में अच्छी भूमिका निभाई थी कि वह उसे मारने वाला था लेकिन पृथ्वीराज चौहान ने उसे मारने नहीं दिया।

वह एक चतुर व्यक्ति था वह अपने स्थान पर वापस चला गया और तराइन की दूसरी लड़ाई के लिए फिर से एक और रणनीति बनाने लगा और उसने अपनी पिछली सभी गलतियों से बहुत कुछ सीखा जो उसने पहली लड़ाई में की थी।

उसके बाद उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को पत्र भेजकर कहा कि ‘यह आपके लिए अच्छा है यदि आप आत्मसमर्पण करते हैं’ पृथ्वीराज चौहान को विश्वास नहीं हो रहा था।

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच हुआ दूसरा युद्द – तराइन का दूसरा युद्ध (1192)

Second battle between Mohammad Ghori and Prithviraj Chauhan in Hindi (Second Battle of Tarain)

प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान से पराजित होने के बाद मोहम्मद गौरी ने अपनी और अधिक शक्ति और साहस के साथ पृथ्वीराज चौहान पर साल 1192 में तराइन के मैदान में ही आक्रमण कर दिया, पृथ्वीराज चौहान के पास एक बड़ी सेना थी और वहां 3000 हाथी, 300000 घुड़सवार और पैदल सेना थी। जबकि गौरी के पास मात्र 120000 पूरी तरह से प्रशिक्षित आदमी थे। पृथ्वीराज चौहान जानते थे कि गोरी की सेना उसकी सेना का सामना नहीं कर सकती।

तराइन के दूसरे युद्ध के लिए उसने एक रणनीति बनाई उसने अपनी सेना को पाँच भागों में बाँट दिया, उसने कहा कि हम चारों तरफ से हमला करेंगे और पाँचवाँ डिवीजन आरक्षित रहेगा।

फिर उसने पृथ्वीराज चौहान की सेना पर चारों ओर से हमला करना शुरू कर दिया लेकिन फिर से पृथ्वीराज चौहान सेना उसकी सेना पर हावी हो रही थी। गौरी ने अपनी सेना को भागने की आज्ञा दी तो पृथ्वीराज चौहान ने सोचा कि वे उससे डरते हैं और वे उससे दूर भाग रहे हैं लेकिन यह एक रणनीति थी।

गौरी की सेना को भागता देख पृथ्वीराज चौहान ने अपनी सेना को आज्ञा दी, उसका पीछा किया, और जब उसकी सेना पीछा कर रही थी, घोर ने अपने पांचवें डिवीजन पर हमला करने की आज्ञा दी। उनके 5वें डिवीजन ने पृथ्वीराज चौहान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे पृथ्वीराज चौहान को हार का सामना करना पड़ा।

और इस युद्ध में मोहम्मद गौरी के पराक्रम के सामने महान योद्दा पृथ्वीराज चौहान का साहस भी कमजोर पड़ गया और वे इस युद्ध में हार गए।

इस तरह मोहम्मद गोरी ने चौहान साम्राज्य का नाश कर दिल्ली और अजमेर पर जीत हासिल कर ली। वहीं तराइन के इस दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान के सबसे भरोसेमंद सामंत और दिल्ली के तोमर शासक गोविंदराज की मौत हो गई। इस युद्ध में हारने के बाद पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी की मौत भी हो गई, हालांकि मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान की मौत के बारे में इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं।

पृथ्वीराज के साम्राज्य के विरुद्ध अन्य विजय

Other Victories Against Prithviraj Empire in Hindi

तुर्की सेनाओं ने हांसी, सरस्वती और समाना के किलों पर अधिकार कर लिया। इसके बाद तुर्की सेना ने अजमेर को अपने अधिकार में कर लिया। रायपिथौरा (पृथ्वीराज चौहान) के कुछ सिक्कों में एक तरफ तिथि और पृथ्वीराज का चित्र तथा दूसरी ओर ‘मुहम्मद साम’ शब्द अंकित मिलता है। इसकी पुष्टि एक अर्थ समकालीन संस्कृति विवरण विरुद्ध विधि-विध्वंस’ से भी होती है। इससे पता चलता है कि पृथ्वीराज को अजमेर पर कुछ समय तक शासन करने के लिए छोड़ दिया गया था। लेकिन इसके तुरन्त बाद षड्यंत्र का आरोप लगाकर मार डाला गया।

रायपिथौरा के पुत्र गोविन्दराज को कुछ समय तक मालगुजारी और स्वामीभक्ति के समस्त कर्तव्य स्वीकार्य कराकर अधीनस्थ शासक की भाँति शासन करने दिया गया। लेकिन दिल्ली में तोमर वंश के एक राजकुमार को शासक स्वीकार किया गया। इस प्रकार इन दो राजपूत वंशों की नियुक्ति द्वारा मुहम्मद गोरी ने राजपूतों की एकता को तोड़ने का प्रयास किया। इस प्रकार दिल्ली और पूर्वी राजस्थान के क्षेत्र तुर्की के शासन के अधीन होगें। इस प्रकार के शासन की व्यवस्था करके मुहम्मद गोरी वापस गज़नी लौट गया और भारतीय विजित क्षेत्रों की रक्षा की जिम्मेदारी कुत्बुद्दीन ऐबक पर छोड़ा गया,

चंदावरी की लड़ाई

Battle of Chandavari in Hindi

वर्ष 1193 या 1194 में, उन्होंने चंदावर शासनकाल में कन्नौज के जयचंद पर हमला किया जो अब फिरोजाबाद के पास स्थित है, उस लड़ाई में, उसने जयचंद को हराया, उसे हराकर मुहम्मद घोर ने आगरा और उत्तरी भारत के अन्य हिस्सों पर अधिकार कर लिया।

इसके बाद दिल्ली सल्तनत अस्तित्व में आई जिसने अगले 600 वर्षों तक शासन किया  कुतुबुद्दीन ऐबक उसका सबसे महत्वपूर्ण दास था और दिल्ली सल्तनत का पहला शासक बन गया और गुलाम वंश की नींव रखी।

मोहम्मद गोरी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया

How many times did Muhammad Ghori attack India?

मोहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण करने लिए पहले सिंधु और मुल्तान दोनों पर विजय प्राप्त की थी। उसके बाद उसने लाहौर और पंजाब को जीत लिया था।

उसने पृथ्वीराज चौहान को हराने के लिए 18 बार लड़ाई की थी जिसमे से उसे 17 बार हार का सामना करना पड़ा था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने 1192 में अपनी 18वी लड़ाई और तराइन के दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को हराया था और अपनी सभी 17 हारो का बदला लिया।

वह भारत में इस्लामी साम्राज्य की नींव रखने में सफल रहा। उसने कन्नौज के जयचंद को हराकर चीनी मिट्टी के बरतन की लड़ाई जीती।

मोहम्मद गौरी और राजा जयचंद की गद्दारी

The betrayal of Mohammad Ghori and Raja Jaichand in Hindi

मोहम्मद गौरी को भारत में पूरी तरह से अपने साम्राज्य को खड़ा करने के लिए पृथ्वीराज चौहान को हराना बहुत जरुरी था लेकिन पृथ्वीराज से लगातार 17 लड़ाईयों में मुँह की खाने के बाद भी उसने भारत पर कब्ज़ा करने की नियत नहीं बदली।

इस बार उन्होंने चंदावर शासनकाल में कन्नौज के जयचंद को अपने साथ मिला लिया और उनसे पृथ्वीराज चौहान के बारे गुप्त बातें पता की और उन्हें पता चला की चौहान कभी भी शाम होने के बाद लड़ाई नहीं किया करते थे जो नियम थे।

गौरी को ऐसे ही मौके की तलाश थी और बस इसी बात का फायदा उठाकर और अपने साथ मित्र चंदावर शासनकाल में कन्नौज के जयचंद के साथ मिलकर पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया था। उसके बाद उनके साथी मित्र के साथ उन्होंने दगा कर दिया और कन्नौज के जयचंद (जिन्होंने गौरी को पृथ्वीराज चौहान को हराने में साथ दिया था ) के साथ ही युद्द छेड़ दिया और उनको मार दिया। इस युद्द को चंदावरी की लड़ाई का नाम दिया गया।

मुहम्मद गोरी का व्यक्तित्व

Personality of Muhammad Ghori in Hindi

ऐसा माना जाता है कि मोहम्मद गौरी एक बहुत ही महत्वकांशी शासक था जिसको थोड़े से में ही संतुष्टि नहीं होती थी और वह जानता था कि भारत देश एक बहुत ही धनी और संपन्न देश था और वह भारत पर अपना साम्राज्य भी बढ़ाना चाहता था और इस तरह उसने भारत पर अपनी सियासत को बनाने का मन बना लिया था।

वह महमूद गजनी की तरह सहनशील नहीं था। तराइन की दूसरी लड़ाई जीतने के बाद घोर के मुहम्मद ने पृथ्वीराज चौहान के रिश्तेदारों को पृथ्वीराज चौहान का राज्य लौटा दिया और कहा कि आज से तुम मेरे नियंत्रण में काम करोगे,

तराइन की दूसरी लड़ाई जीतने के बाद अगर वह चाहता तो सभी राजपूतों को मार सकता था लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि कूटनीति बहुत अच्छी चीज है और उसे भारत में भी रहना है।

मुहम्मद गौरी की मृत्यु

Muhammad Ghori death in Hindi

पृथ्वीराज के करीबी दोस्त एवं महाकवि चंदरबदाई के मुताबिक तराइन के दूसरे युद्ध में जीतने के बाद मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को बंधक बना लिया और उन्हें अपने साथ गजनी ले गया। इसके बाद पृथ्वीराज चौहान ने अपनी शब्दभेदी वाण की अद्भुत कला से मोहम्मद गौरी के दरबार में आयोजित तीरंदाजी प्रतियोगिता में गौरी को मार दिया। और इसके बाद पृथ्वीराज चौहान और चंदबरदाई भी मारे गए।

जबकि अन्य इतिहासकारों के मुताबिक तराइन के दूसरे युद्द में हारने के बाद पृथ्वीराज चौहान ने अपनी अधीनता स्वीकार कर ली और गौरी ने उसे अजमेर में अपने अधीन रखकर शासन करवाया। और फिर पृथ्वीराज को मरवा दिया और उसकी कब्र को अफगानिस्तान में गढ़वा दिया।

फिलहाल, इसके बाद मोहम्मद गौरी और कन्नौज के राज् जयचंद जिसने पृथ्वीराज के खिलाफ युद्ध में साथ दिया था, दोनों के बीच युद्ध हुआ। मोहम्मद गौरी ने जयचंद की धोखेबाजी से गुस्साकर उस पर आक्रमण कर दिया। उन दोनों के बीच हुए युद्ध को “चंद्रवार” कहा गया। युद्ध जीतने के बाद गौरी अपने अपने राज्य गजनी वापस लौट गया था, हालांकि इससे पहले उसने अपने एक काबिल गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को दिल्ली का सुल्तान बना दिया था।

जबकि एक मत अनुसार 1206 ई.में मुहम्मद गौरी ने पंजाब के खोखर जनजाति के विद्रोह को दबाने के लिये भारत पर अंतिम आक्रमण किया तथा इस अभियान के दौरान दमयक (पश्चिमि पाकिस्तान) के पास गौरी की हत्या कर दी गई। गौरी इस समय सिंध नदी के किनारे नमाज पढ रहा था। हत्यारे ने उन्हें इतनी बेरहमी से मार डाला कि उनके शरीर पर 22 घाव थे। उनकी इच्छा के अनुसार, गौरी को वहीं दफनाया गया, जहां वे गिरा था,

बहुत सी कहानियों में ऐसा भी कहा जाता है कि मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज चौहान द्वारा मारा गया परंतु इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल पाया है कि मोहम्मद गौरी की मृत्यु कैसे हुई और किसने उसे मारा। मगर 1206 तक शासन करके मोहम्मद गोरी ने अपनी सियासत को भारत में जमा कर अपने गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक के हाथों सब कुछ सौंप दिया।

वहीं कुछ इतिहासकारों के मुताबिक साल 1206 ईसवी में मोहम्मद गौरी की मौत के बाद भारत में कुतुबुद्दीन ऐबक ने एक नए गुलाम वंश की नींव डाली। जिसकी नींव पर दिल्ली सल्तनत और खिलजी, मुगल, लोदी, तुगलक,सैय्यद, आदि राजवंशों की आधारशिला रखी गई थी।

हालांकि, गुलाम वंश के शासकों ने तो 1206 से 1290 तक ही शासन किया, लेकिन उनके शासन की नींव पर ही दिल्ली के तख्‍त पर अन्य विदेशी मुस्लिमों ने कई सालों तक राज किया, जो कि करीब 1707 ईसवी तक ओरंगजेब की मृत्यु तक चला। वहीं मोहम्मद गौरी ने अपने राज में विशेष प्रकार के सिक्के भी चलाए थे, जिनके एक तरफ कलमा खुदा रहता था, जबकि दूसरी तरफ लक्ष्मी की आकृति बनी हुई थी।

मोहम्मद गोरी की वीरता और साहस के किस्से भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखे गए हैं। वहीं उसे भारत में तुर्क साम्राज्य के संस्थापक के रुप में आज भी याद किया जाता है।

मुहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद साम्राज्य का विभाजन

The division of the empire after the death of Muhammad Ghori in Hindi

मुहम्मद गौरी ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही अपने दासों को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। गौरी ने लक्ष्मी की आकृति वाले कुछ सिक्के चलाये थे। गौरी की मृत्यु के बाद उसका साम्राज्य उसके तीन प्रमुख दासों में विभाजित हुआ।

  1. कुतुबुद्दीन ऐबक – भारतीय क्षेत्र, ऐबक ने दिल्ली को इस्लामी साम्राज्य का केन्द्र बनाया।
  2. ताजुद्दीन यल्दोज – गजनी क्षेत्र,
  3. नासीरुद्दीन कुबाचा – उच्च तथा सिंध (पाकिस्तान)।

मुहम्मद गौरी से संबन्धित प्रश्न और उनके उत्तर FAQ :-

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी कौन था ?

उत्तर :- अफगान सेनापति, भारत का एक आक्रमणकारियों शासक

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी को किसने और कब मारा?

उत्तर :- वर्ष 1206 में 15 मार्च को जब वह अपने अफगानिस्तान के गजनी शासन में वापस जा रहा था, उसका कारवां झेलम नदी के पास विश्राम किया, और हिंदू खोकरों के एक छोटे से समूह द्वारा शाम की प्रार्थना के समय उनकी हत्या कर दी गई थी।

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान पर कितनी बार किए हमले?

उत्तर :- 18 बार किए उन्होंने पृथ्वीराज चौहान पर हमले।

प्रश्न :- पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के बीच कितनी बार युद्ध हुआ?

उत्तर :- 18 बार

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी ने भारत पर क्यों किया आक्रमण?

उत्तर :- भारत उस समय अमीर देश था और देश को लूटने के लिए उन्होंने भारत पर हमला किया था।

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी की कब हुई मृत्यृ?

उत्तर :- मोहम्मद गौरी की मृत्यृ 15 मार्च 1206 को धमियाक, झेलम जिला, घुरिद साम्राज्य (वर्तमान पाकिस्तान ) में हुई थी।

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी के बाद शासन किसने संभाला?

उत्तर :- कुतुबुद्धीन ऐबक

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी का पूरा नाम क्या है?

उत्तर :- मुइज़ुद्दीन मुहम्मद ग़ौरी

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी भारत कब आया ?

Ans : सन 1175 में

प्रश्न :- मोहम्मद गोरी कौन से वंश का था?

उत्तर :- घुरिद वंश

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी को पराजित करने वाला भारत का पहला शासक कौन था?

उत्तर :- भारत में पहली बार मोहम्मद गौरी को पराजित करने वाला भारत का पहला शासक का नाम पृथ्वीराज चौहान था।

प्रश्न :- मोहम्मद गोरी ने भारत पर कितनी बार आक्रमण किया

उत्तर :- 18

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद दिल्ली का शासक कौन बना

उत्तर :- कुतुबुद्धीन ऐबक

प्रश्न :- मोहम्मद गोरी के पिता का क्या नाम था

उत्तर :- मोहम्मद गोरी के पिता का बहालुद्दीन साम प्रथम नाम था

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी का जन्म कहाँ हुआ था

उत्तर :- मोहम्मद गौरी का जन्म गोर, घुरिद साम्राज्य (वर्तमान अफगानिस्तान) मे हुआ था।

प्रश्न :- मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच युद्ध कब हुआ था

उत्तर :- मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच पहला युद्ध 1191 मे हुआ था, जिसे तराइन का प्रथम युद्ध (1191) के नाम से जानते है।

तो आपको यह पोस्ट मोहम्मद गोरी का इतिहास जीवन परिचय भारत पर आक्रमण और मृत्यु (History of Muhammad Ghori in Hindi) कैसा लगा कमेंट मे जरूर बताए और इस पोस्ट को लोगो के साथ शेयर भी जरूर करे,

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